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LAC पर चीन की नई चाल: अरुणाचल सीमा के पास बसाए ‘श्याओकांग’ गांव, भारत की चिंता बढ़ी

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 11 मार्च 2026

भारत-चीन सीमा पर चीन की गतिविधियों ने एक बार फिर नई चिंता पैदा कर दी है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास चीन तेजी से ‘श्याओकांग’ गांव बसा रहा है, जिनमें से बड़ी संख्या भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, खासकर अरुणाचल प्रदेश की सीमा के सामने बनाई गई है।

भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में बताया कि चीन पिछले कुछ वर्षों में सीमा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। इसमें सड़कों, संचार सुविधाओं और आधुनिक आवासीय बस्तियों का निर्माण शामिल है। इन गांवों को चीन ‘समृद्ध गांव’ यानी श्याओकांग विलेज के रूप में प्रचारित करता है।

अरुणाचल सीमा के सामने बड़ी संख्या में गांव

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार चीन ने उत्तरी सीमाओं पर सैकड़ों श्याओकांग गांव विकसित किए हैं। इनमें से बड़ी संख्या भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामने है और लगभग 90 प्रतिशत गांव अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास बसाए गए बताए जा रहे हैं।

इन गांवों का निर्माण ऐसे इलाकों में किया गया है जहां चीन लंबे समय से अपना दावा जताता रहा है। भारत अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न अंग मानता है, जबकि चीन इसे तथाकथित ‘दक्षिण तिब्बत’ बताकर दावा करता रहा है।

सैन्य रणनीति से भी जोड़ा जा रहा

विशेषज्ञों का मानना है कि ये गांव सिर्फ सामान्य आबादी बसाने के लिए नहीं हैं, बल्कि इनमें रणनीतिक महत्व भी छिपा हो सकता है। सीमावर्ती इलाकों में बसाई गई आबादी, सड़क नेटवर्क और संचार ढांचा जरूरत पड़ने पर सैन्य गतिविधियों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

इसके अलावा इन बस्तियों के माध्यम से चीन सीमा क्षेत्रों में अपनी स्थायी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इससे भविष्य में सीमा विवाद के मुद्दे पर दबाव बनाने की रणनीति भी जुड़ी हुई मानी जा रही है।

भारत भी बढ़ा रहा सीमा पर विकास

चीन की इन गतिविधियों के बीच भारत भी सीमा क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्यों पर ध्यान दे रहा है। सड़कों, पुलों, सुरंगों और सीमा गांवों के विकास की योजनाओं के जरिए सीमावर्ती इलाकों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि वहां रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और रणनीतिक स्थिति भी मजबूत हो।

सतर्कता बढ़ाने की जरूरत

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह नीति केवल विकास परियोजना नहीं बल्कि भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है। ऐसे में भारत को सीमा पर निगरानी, सैन्य तैयारी और बुनियादी ढांचे के विकास को और तेज करना होगा।

सीमा पर बदलते हालात यह संकेत दे रहे हैं कि LAC पर सतर्कता और रणनीतिक संतुलन बनाए रखना भारत के लिए पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

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