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होर्मुज संकट: भारत चुका रहा युद्ध की भारी कीमत

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एबीसी नेशनल न्यूज | अंतरराष्ट्रीय/व्यापार डेस्क | 10 मार्च 2026

होर्मुज के पास फंसे 37 भारतीय जहाज, 10 हजार करोड़ दांव पर

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पर दिखाई देने लगा है। ईरान के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के पास कम से कम 37 भारतीय जहाज फंस गए हैं, जिन पर करीब 10,000 करोड़ रुपये की संपत्ति दांव पर लगी हुई है। जहाज मालिकों के संगठन ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुरक्षित रास्ता नहीं मिला तो भारत के ऊर्जा और व्यापार नेटवर्क को भारी नुकसान हो सकता है।

1100 से ज्यादा भारतीय नाविक समुद्र में फंसे

इन जहाजों पर मौजूद 1100 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी बड़ी चिंता बन गई है। जहाज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के आसपास खड़े हैं और उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिल पा रही। युद्ध के कारण क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा बना हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां इस रास्ते से गुजरने से बच रही हैं।

क्यों इतना अहम है होर्मुज का रास्ता

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत के लिए इसकी अहमियत और ज्यादा है, क्योंकि देश के करीब 40% कच्चे तेल और 50% एलएनजी आयात इसी मार्ग से आते हैं। यही कारण है कि यहां जरा-सा तनाव भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को झटका दे सकता है।

युद्ध ने रोक दिया जहाजों का आवागमन

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर कड़ी चेतावनी जारी कर दी, जिसके बाद जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है और सैकड़ों जहाज खाड़ी के पानी में ही रुक गए हैं। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार दोनों पर गहरा असर पड़ा है।

तेल की कीमतों से लेकर उद्योग तक असर

युद्ध और समुद्री संकट का असर सिर्फ जहाजों तक सीमित नहीं है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण भारत के कई उद्योग दबाव में आ गए हैं। गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से उर्वरक, प्लास्टिक, सिरेमिक और कई अन्य उद्योगों में लागत तेजी से बढ़ रही है, जिससे उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

सरकार पर बढ़ा दबाव

इस पूरे संकट के बीच भारतीय शिपिंग कंपनियों और व्यापारिक संगठनों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। जहाज मालिक चाहते हैं कि सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करे, ताकि भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो इसका असर भारत के ऊर्जा आयात, व्यापार और महंगाई पर भी पड़ सकता है।

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