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परमाणु कार्यक्रम पर फिर आमने-सामने ईरान और अमेरिका, बातचीत जारी लेकिन सैन्य तैयारी भी तेज

एबीसी नेशनल न्यूज | 16 फरवरी 2026

ईरान और अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में अपने दशकों पुराने परमाणु विवाद को सुलझाने के लिए फिर से बातचीत शुरू की है। दोनों देशों के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है, लेकिन ताज़ा दौर की वार्ता को संभावित टकराव टालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर पारदर्शिता और नियंत्रण को लेकर सहमति बनाना है, ताकि पश्चिम एशिया में हालात और न बिगड़ें।

हालांकि वार्ता की मेज पर संवाद जारी है, लेकिन जमीन पर सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया है कि अमेरिका ने क्षेत्र में अपना दूसरा विमानवाहक पोत (aircraft carrier) तैनात कर दिया है। यह कदम संकेत देता है कि वॉशिंगटन बातचीत के साथ-साथ किसी भी संभावित सैन्य परिदृश्य के लिए तैयार रहना चाहता है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका एक “दीर्घकालिक सैन्य अभियान” की संभावना को भी खारिज नहीं कर रहा।

ईरान ने अब तक अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्य वाला बताया है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आशंका है कि तेहरान परमाणु हथियार क्षमता की ओर बढ़ सकता है। 2015 का परमाणु समझौता (JCPOA) पहले ही कमजोर पड़ चुका है और 2018 में अमेरिका के उससे बाहर निकलने के बाद तनाव और बढ़ गया था। तब से प्रतिबंधों, जवाबी कदमों और क्षेत्रीय तनाव का सिलसिला जारी है।

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वार्ता पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिए बेहद अहम है। यदि बातचीत सफल होती है तो क्षेत्र में संभावित सैन्य टकराव टल सकता है। लेकिन अगर वार्ता टूटती है, तो स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा।

फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कूटनीति जीतती है या टकराव की राह खुलती है। बातचीत और सैन्य तैयारी—दोनों साथ-साथ चल रहे हैं, जिससे हालात संवेदनशील बने हुए हैं।

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