एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 16 फरवरी 2026
दुनिया तेजी से बदल रही है। तकनीक हमारे काम करने, सीखने और सोचने के तरीके को नया रूप दे रही है। ऐसे दौर में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का यह कहना कि ग्लोबल साउथ का पहला AI समिट भारत में होना चाहिए, अपने आप में एक बड़ी बात है। यह सिर्फ एक सम्मेलन की मेजबानी का सवाल नहीं, बल्कि यह भरोसे का संकेत है—कि भारत आज वैश्विक तकनीकी चर्चा के केंद्र में खड़ा है।
गुटेरेस ने कहा कि भारत के पास वह अनुभव और क्षमता है, जो विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से दुनिया के सामने रख सके। उनका इशारा साफ था—AI जैसे बड़े विषय पर केवल अमीर और विकसित देशों की सोच नहीं चलेगी। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को भी बराबरी से सुना जाना चाहिए। भारत, जो खुद ग्लोबल साउथ का एक मजबूत प्रतिनिधि है, इस भूमिका को बेहतर तरीके से निभा सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने डिजिटल क्रांति की नई मिसालें पेश की हैं—डिजिटल भुगतान, स्टार्टअप संस्कृति, आईटी सेवाएं और तकनीकी प्रतिभा ने दुनिया का ध्यान खींचा है। ऐसे में अगर AI समिट यहां होता है, तो यह सिर्फ मंच नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा अवसर होगा जहां विकासशील देश अपनी चुनौतियों और उम्मीदों को साझा कर सकेंगे। सवाल सिर्फ तकनीक का नहीं है, बल्कि रोजगार, नैतिकता, डेटा सुरक्षा और सामाजिक संतुलन का भी है।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के इस बयान को कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि भारत को अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि नीति और नेतृत्व के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अभी समिट की तारीख और औपचारिक घोषणा बाकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि AI की वैश्विक बहस में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
दुनिया जब नई तकनीकी दिशा तय करेगी, तो संभव है कि उस चर्चा की शुरुआत भारत की धरती से हो—और यही इस बयान का असली संदेश है।




