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पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ‘फेस सेविंग’ कोशिश? मतदाता सूची में भारी गड़बड़ियों के बीच 7 AERO सस्पेंड

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एबीसी नेशनल न्यूज | कोलकाता | 16 फरवरी 2026

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवाद के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सात सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (AERO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आयोग का कहना है कि यह कदम गंभीर अनियमितताओं और कर्तव्य में लापरवाही के आरोपों के आधार पर उठाया गया है। लेकिन राजनीतिक हलकों में इस कार्रवाई को आयोग की “फेस सेविंग” यानी अपनी साख बचाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर भारी सवाल उठ रहे थे।

क्यों उठे ‘फेस सेविंग’ के सवाल?

मतदाता सूची से पहले ड्राफ्ट चरण में करीब 58 लाख नाम हटाए जाने की खबरों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी थी। इसके बाद सुनवाई प्रक्रिया के दौरान लगभग 6.61 लाख और नाम हटाए जाने की संभावना जताई गई। विपक्ष और सत्तारूढ़ दल दोनों ने अलग-अलग आधारों पर आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। आरोप लगे कि कई वैध मतदाताओं के नाम मामूली तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटियों के कारण सूची से बाहर कर दिए गए।

इसी पृष्ठभूमि में सात अधिकारियों का निलंबन ऐसे समय आया है जब आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे थे। विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई के जरिए आयोग यह संदेश देना चाहता है कि वह अनियमितताओं को लेकर गंभीर है और जवाबदेही तय करेगा।

कार्रवाई का कानूनी आधार

निर्वाचन आयोग ने Representation of the People Act, 1950 की धारा 13CC के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह कदम उठाया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों पर गंभीर कदाचार, वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग और कर्तव्य में लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि निलंबित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए और आयोग को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाए। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जांच में और गड़बड़ियां सामने आती हैं तो अतिरिक्त कार्रवाई की जा सकती है।

किन क्षेत्रों में सामने आईं गड़बड़ियां?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार समसेरगंज, फरक्का, मयनागुड़ी, सुती, कैनिंग पूर्व और देबरा जैसे विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े अधिकारियों को निलंबित किया गया है। यह दर्शाता है कि मामला किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। हालांकि आयोग की ओर से सभी नामों की विस्तृत आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई है।

SIR प्रक्रिया और राजनीतिक टकराव

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करना है—मृत, स्थानांतरित या अपात्र नामों को हटाना और पात्र नागरिकों को शामिल करना। लेकिन पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है।

मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी पार्टी TMC ने आरोप लगाया है कि वैध मतदाताओं के नाम हटाकर चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। दूसरी ओर आयोग का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।

निलंबित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच अब शुरू होगी। अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जानी है, जिससे पहले यह विवाद और तेज हो सकता है।

चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठे सवालों के बीच आयोग की यह कार्रवाई एक सख्त प्रशासनिक कदम है, लेकिन क्या इससे विवाद थमेगा या और गहराएगा—यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक और कानूनी बहस का बड़ा केंद्र बन चुका है।

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