एबीसी नेशनल न्यूज | कानपुर | 12 फरवरी 2026
कानपुर (उत्तर प्रदेश): चर्चित लैंबॉर्गिनी कांड में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है, जहां आरोपी शिवम मिश्रा को गिरफ्तारी के करीब सात घंटे के भीतर ही जमानत मिल गई, जबकि अदालत ने पुलिस की रिमांड याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला उस सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें कानपुर के वीआईपी रोड पर तेज रफ्तार लग्ज़री कार के अनियंत्रित होने से अफरा-तफरी मच गई थी और कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पुलिस ने शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और आगे की पूछताछ के लिए उसे पुलिस हिरासत में देने की मांग की, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए रिमांड देने से इनकार कर दिया कि फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर हिरासत आवश्यक प्रतीत नहीं होती। अदालत ने आरोपी को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने दलील दी कि दुर्घटना के समय कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था और मामले की गहराई से जांच के लिए उससे पूछताछ जरूरी है। पुलिस का कहना था कि दुर्घटना की परिस्थितियों, वाहन की गति, तकनीकी पहलुओं और अन्य संभावित तथ्यों की पुष्टि के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि गिरफ्तारी जल्दबाजी में की गई है, आरोपी फरार होने वाला नहीं है और वह जांच में पूरा सहयोग करेगा। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य पुलिस के पास हैं, ऐसे में रिमांड की जरूरत नहीं बनती।
कोर्ट के इस फैसले के बाद शिवम मिश्रा को कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहा कर दिया गया। हालांकि मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है और पुलिस अपनी नियमित जांच जारी रखेगी। अब बिना रिमांड के ही साक्ष्य जुटाने, तकनीकी रिपोर्ट लेने और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में पुलिस की तैयारी, कानूनी रणनीति और अदालत की प्राथमिकताएं किस तरह काम करती हैं। फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और अदालत में आगे क्या रुख सामने आता है।





