एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 12 फरवरी 2026
केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri का नाम अमेरिकी वित्तीय कारोबारी और दोषी यौन अपराधी Jeffrey Epstein से जुड़े कुछ सार्वजनिक दस्तावेजों और ईमेल रिकॉर्ड में सामने आने के बाद भारतीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इस मामले में व्यापक पारदर्शिता की मांग कर रहा है और यह जानना चाहता है कि क्या किसी अन्य भारतीय राजनेता या नीति-निर्माता का नाम भी इन रिकॉर्ड्स में आता है।
उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं के अनुसार, वर्ष 2014 के दौरान न्यूयॉर्क में आयोजित कुछ बैठकों में पुरी की उपस्थिति का उल्लेख मिलता है। इन बैठकों में इज़राइल के पूर्व प्रधानमंत्री Ehud Barak और अमेरिकी अर्थशास्त्री Lawrence Summers जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि इन बैठकों के एजेंडा, निर्णय या किसी भारतीय सरकारी नीति से संबंध को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन ईमेल में कई नाम हैं। जिसमें मोदी का नाम भी आया है। जो संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उठाने की कोशिश भी की थी लेकिन उनको बोलने नहीं दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने यह दावा किया है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों में भारत से जुड़े अन्य प्रमुख नामों का भी उल्लेख है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से Narendra Modi का नाम लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
Bharatiya Janata Party ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष बिना प्रमाण के राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा का कहना है कि एप्स्टीन से जुड़े वैश्विक रिकॉर्ड में अनेक अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के नाम विभिन्न संदर्भों में आए हैं, लेकिन केवल नाम का उल्लेख किसी आपराधिक या नीति-संबंधी साजिश का प्रमाण नहीं होता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा संसद और चुनावी राजनीति में और तेज हो सकता है। विपक्ष इसे जवाबदेही और पारदर्शिता का सवाल बना रहा है, जबकि सरकार इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा करार दे रही है। आने वाले दिनों में यदि और दस्तावेज सार्वजनिक होते हैं या कोई औपचारिक जांच शुरू होती है, तो राजनीतिक प्रभाव का दायरा बढ़ सकता है।
फिलहाल, उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में किसी भी भारतीय शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। लेकिन विपक्ष की मांग है कि यदि किसी भी स्तर पर नाम सामने आते हैं, तो सरकार को स्पष्ट और पारदर्शी जवाब देना चाहिए।
एप्स्टीन विवाद ने भारतीय राजनीति में एक नया विमर्श खड़ा कर दिया है—क्या यह केवल अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का मामला है, या इससे आगे कोई राजनीतिक असर निकल सकता है? आने वाला समय ही इसकी दिशा तय करेगा।




