एबीसी नेशनल न्यूज | मुंबई | 11 फरवरी 2026
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि युग बन जाते हैं। 70 और 80 के दशक में जहां सिनेमा का चेहरा “एंग्री यंग मैन” के रूप में उभरा, वहीं 90 के दशक के बाद रोमांस और ग्लोबल अपील ने एक नई पहचान बनाई। इस बदलते परिदृश्य में दो नाम सबसे प्रमुख हैं — Amitabh Bachchan और Shah Rukh Khan। दोनों ने अपने-अपने दौर में हिंदी सिनेमा पर राज किया, लेकिन दोनों के स्टारडम की प्रकृति और यात्रा में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
एंग्री यंग मैन का स्वर्णिम युग
1970 के दशक में जब देश सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल से गुजर रहा था, तब अमिताभ बच्चन का व्यक्तित्व उस गुस्से और संघर्ष का प्रतीक बनकर उभरा। Zanjeer, Deewaar और Sholay जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार ही नहीं, बल्कि जनभावनाओं की आवाज बना दिया। उनकी गहरी आवाज, संवाद अदायगी और गंभीर व्यक्तित्व ने उन्हें उस दौर का सबसे बड़ा सितारा बना दिया।
लेकिन 1990 के दशक के अंत और 2000 के शुरुआती वर्षों में सिनेमा की दिशा बदली और बच्चन ने भी अपने किरदारों को बदला। Mohabbatein और Baghban में उन्होंने पिता, प्रिंसिपल और परिवार के मुखिया जैसे रोल निभाए। 58–60 की उम्र में उन्होंने मुख्य रोमांटिक हीरो की छवि से आगे बढ़कर चरित्र भूमिकाएं स्वीकार कर लीं। यह बदलाव उस समय के सिनेमा और दर्शकों की अपेक्षाओं के अनुरूप था।
रोमांस से एक्शन तक: शाहरुख का ग्लोबल ट्रांसफॉर्मेशन
दूसरी ओर, 1990 के दशक में रोमांस के नए प्रतीक के रूप में उभरे शाहरुख खान ने अलग तरह की स्टार छवि बनाई। Dilwale Dulhania Le Jayenge और Kuch Kuch Hota Hai ने उन्हें “किंग ऑफ रोमांस” बना दिया।
दिलचस्प बात यह है कि लगभग 60 वर्ष की उम्र में भी शाहरुख मुख्यधारा के हीरो की भूमिका में नजर आते हैं। 2023 में आई Pathaan और Jawan ने वैश्विक स्तर पर 1000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया। “Jawan” हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्मों में शामिल हुई। इन फिल्मों में शाहरुख ने न सिर्फ एक्शन हीरो का अवतार अपनाया, बल्कि अपने लुक, बॉडी लैंग्वेज और स्टाइल को भी नए दौर के अनुरूप ढाला।
उनकी फिल्म Dunki ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि शाहरुख ने ओटीटी, सोशल मीडिया और वैश्विक ब्रांडिंग को भी अपने स्टारडम का हिस्सा बनाया।
उम्र और इमेज: असली फर्क कहाँ है?
अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी उम्र के साथ निभाए गए किरदारों में दिखाई देता है। बच्चन ने 60 के आसपास चरित्र भूमिकाओं को स्वीकार किया, जबकि शाहरुख आज भी मुख्यधारा के रोमांटिक और एक्शन हीरो के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं।
यह बदलाव सिर्फ व्यक्तिगत पसंद का नहीं, बल्कि समय और बाजार की मांग का भी परिणाम है। आज का सिनेमा मल्टीप्लेक्स, ग्लोबल बॉक्स ऑफिस और डिजिटल प्रमोशन के दौर में है, जहां स्टार की ब्रांड वैल्यू सीमाओं से परे जाती है। शाहरुख ने खुद को लगातार अपडेट रखा — नई स्क्रिप्ट, नए निर्देशक, हाई-ऑक्टेन एक्शन और इंटरनेशनल मार्केट पर फोकस — यही कारण है कि उनका स्टारडम ग्लोबल स्तर पर स्थापित हुआ।
दो महानायक, दो अलग यात्राएँ
अमिताभ बच्चन ने भारतीय सिनेमा को एक सशक्त, गंभीर और सामाजिक रूप दिया। वहीं शाहरुख खान ने रोमांस को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और खुद को बदलते दौर के साथ ढाला।
दोनों ही अपने-अपने समय के महानायक हैं, लेकिन आज के संदर्भ में शाहरुख का स्टारडम उम्र की परिभाषा को चुनौती देता नजर आता है। यही वजह है कि 60 की उम्र के करीब पहुंचकर भी वे सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक ग्लोबल आइकॉन के रूप में देखे जाते हैं।
बॉलीवुड की कहानी दरअसल इन दोनों युगों की कहानी है — एक जिसने सिनेमा को गहराई दी, और दूसरा जिसने उसे दुनिया के मंच पर पहुंचाया।






