एबीसी नेशनल न्यूज | वाशिंगटन | 11 फरवरी
अमेरिका की अटॉर्नी जनरल Pam Bondi आज अमेरिकी United States House of Representatives की एक महत्वपूर्ण समिति के सामने पेश होने जा रही हैं, जहां उनसे कुख्यात वित्तीय कारोबारी और दोषी यौन अपराधी Jeffrey Epstein से जुड़े दस्तावेजों के प्रबंधन को लेकर कड़े सवाल पूछे जाने की उम्मीद है। यह सुनवाई ऐसे समय में हो रही है जब न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक की गई एपस्टीन फाइल्स में भारी संपादन (रेडक्शन) को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ी हुई है और पारदर्शिता बनाम गोपनीयता का मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुका है।
कांग्रेस के कई सदस्यों का आरोप है कि एपस्टीन से संबंधित हजारों पन्नों के दस्तावेज जब सार्वजनिक किए गए, तब उनमें कई महत्वपूर्ण हिस्सों को काला कर दिया गया या हटा दिया गया, जिससे यह आशंका पैदा हुई कि कहीं प्रभावशाली लोगों से जुड़े संदर्भों को छिपाया तो नहीं गया। सांसदों का कहना है कि यदि कानून के तहत फाइलें सार्वजनिक की गई हैं, तो उनमें अनावश्यक कटौती क्यों की गई और किन आधारों पर की गई। यह भी पूछा जा सकता है कि क्या न्याय विभाग ने कांग्रेस को पूरी और स्पष्ट जानकारी दी थी या नहीं।
दूसरी ओर United States Department of Justice का पक्ष है कि दस्तावेज जारी करते समय पीड़ितों की पहचान, गोपनीयता और संवेदनशील कानूनी पहलुओं की रक्षा करना अनिवार्य था। विभाग का तर्क है कि कुछ जानकारियां हटाना कानूनन जरूरी था, ताकि जांच प्रक्रिया और संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। हालांकि आलोचकों का मानना है कि पारदर्शिता के नाम पर अधूरी जानकारी देना जनता के विश्वास को कमजोर करता है और इससे न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
एपस्टीन प्रकरण पहले ही अमेरिका की राजनीति, न्याय व्यवस्था और प्रभावशाली वर्गों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर चुका है। वर्षों पहले हुई गिरफ्तारी, मुकदमे और जेल में मौत के बाद भी यह मामला खत्म नहीं हुआ। उलटे, इससे जुड़े दस्तावेज और कथित संपर्कों की सूची बार-बार राजनीतिक तूफान खड़ा करती रही है। अब जब अटॉर्नी जनरल स्वयं कांग्रेस के सामने जवाब देंगी, तो यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि जवाबदेही की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस सुनवाई के दूरगामी राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। यदि सांसदों को संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो न्याय विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर नई बहस शुरू हो सकती है। वहीं यदि बॉन्डी स्पष्ट और ठोस स्पष्टीकरण देने में सफल रहती हैं, तो सरकार यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि संवेदनशील मामलों में संतुलित और कानूनी ढंग से निर्णय लिया गया। फिलहाल वाशिंगटन की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला केवल एक व्यक्ति या एक फाइल का नहीं, बल्कि अमेरिकी लोकतंत्र में जवाबदेही और विश्वास की कसौटी बन चुका है।




