एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 11 फरवरी 2026
“राजनीति में भी ग्रिप होती है”: मार्शल आर्ट से सत्ता पर वार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने आज सदन में अपने संबोधन के दौरान एक अनोखी लेकिन तीखी उपमा देते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मार्शल आर्ट की बुनियाद “ग्रिप” से शुरू होती है—जब एक खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंद्वी को पकड़ लेता है और धीरे-धीरे “चोक” की स्थिति में पहुंच जाता है। उस समय प्रतिद्वंद्वी की आंखों में साफ दिख जाता है कि वह अब नियंत्रण में है। राहुल गांधी ने कहा कि राजनीति में भी ऐसी ही ग्रिप होती है, फर्क सिर्फ इतना है कि वह दिखाई नहीं देती। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में कौन किस पर दबाव बना रहा है, यह आम लोगों को नजर नहीं आता, लेकिन उसके नतीजे देश को भुगतने पड़ते हैं।
“टैप करके सरेंडर”: विदेश नीति पर सीधा सवाल
अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा कि जब किसी खिलाड़ी को एहसास हो जाता है कि वह बच नहीं पाएगा, तो वह ‘टैप’ कर देता है—यानी सरेंडर कर देता है। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की मौजूदा सरकार वैश्विक मंच पर दबाव में निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि देश की विदेश नीति आत्मसम्मान और स्वतंत्रता पर आधारित होनी चाहिए, न कि किसी भी प्रकार की बाहरी ग्रिप के आगे झुकने पर। उनके बयान को हालिया भारत-अमेरिका संबंधों और व्यापारिक समझौतों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
“भारत का भविष्य, बीजेपी की वित्तीय संरचना की ढाल?”
राहुल गांधी ने अपने आरोपों को और तीखा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारत के भविष्य को दांव पर लगाकर भारतीय जनता पार्टी की “वित्तीय संरचना” को बचाने की कोशिश की है। उन्होंने संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ ऐसे दबाव या जांच की स्थितियां बनी हैं, जिनसे निपटने के लिए सरकार राष्ट्रीय हितों से समझौता कर रही है। यह आरोप गंभीर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। हालांकि उन्होंने किसी विशिष्ट दस्तावेज़ या समझौते का सीधा उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनका संदेश साफ था—विदेश नीति और आर्थिक निर्णयों में पारदर्शिता की जरूरत है।
अमेरिका के संदर्भ में टिप्पणी
राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का नाम लेते हुए कहा कि भारत को किसी भी वैश्विक शक्ति के सामने झुकने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी देश की आंखों में “चोक” की झलक दिखने लगे, तो यह राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए चिंताजनक संकेत है। उनके इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया और सदन में हंगामा
राहुल गांधी के आरोपों पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। भाजपा सांसदों ने कहा कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र, संतुलित और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है तथा ऐसे बयान देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। कुछ समय के लिए सदन में शोर-शराबा भी हुआ, जिसके बाद कार्यवाही आगे बढ़ाई गई। सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए विदेश नीति जैसे संवेदनशील विषय को विवाद का मुद्दा बना रहा है।
बहस अब संसद से बाहर भी
राहुल गांधी का यह बयान संसद के भीतर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान और पारदर्शिता का मुद्दा बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे निराधार आरोप करार दे रहा है।
स्पष्ट है कि विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक दबावों को लेकर आने वाले दिनों में सियासी बहस और तेज होने वाली है।



