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वंदे मातरम के लिए नए दिशा – निर्देश : खड़े होना अनिवार्य, लेकिन सिनेमा हॉल में नहीं

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 11 फरवरी 2026

सरकार ने जारी किए स्पष्ट प्रोटोकॉल

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और उसके सार्वजनिक उपयोग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रोटोकॉल का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना को औपचारिक स्वरूप देना और सरकारी कार्यक्रमों में एक समान आचरण सुनिश्चित करना है। लंबे समय से यह मांग उठती रही थी कि ‘वंदे मातरम’ के प्रस्तुतीकरण और उससे जुड़े शिष्टाचार को लेकर स्पष्ट नियम तय किए जाएं। अब जारी दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किन अवसरों पर इसे बजाया या गाया जाएगा और उस समय उपस्थित लोगों का व्यवहार कैसा होना चाहिए।

औपचारिक कार्यक्रमों में खड़े होना अनिवार्य

नए नियमों के अनुसार, जब किसी सरकारी, अर्धसरकारी या अन्य आधिकारिक कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ प्रस्तुत किया जाएगा, तब सभी उपस्थित लोगों को सम्मानपूर्वक खड़े होना होगा। यह प्रावधान तिरंगा फहराने के अवसरों, राष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदाधिकारियों की मौजूदगी वाले आयोजनों तथा अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों पर लागू होगा। दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों शामिल हों, तो ‘वंदे मातरम’ पहले प्रस्तुत किया जाएगा।

सभी छंदों के पूर्ण गायन पर जोर

सरकार ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि ‘वंदे मातरम’ के सभी निर्धारित छंदों को पूर्ण रूप से गाया या बजाया जाए, विशेषकर औपचारिक अवसरों पर। अधिकारियों का मानना है कि गीत को आंशिक या संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उसकी संपूर्ण संरचना के साथ सम्मान देना आवश्यक है। इससे गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मूल भावना को सही रूप में सामने लाने में मदद मिलेगी।

सिनेमा हॉल में खड़े होने की बाध्यता नहीं

हालांकि सरकार ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टता भी दी है। यदि ‘वंदे मातरम’ किसी फिल्म, समाचार फ़िल्म, डॉक्यूमेंट्री या अन्य ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति का हिस्सा बनकर सिनेमा हॉल में प्रदर्शित होता है, तो दर्शकों के लिए खड़े होना अनिवार्य नहीं होगा। सरकार का तर्क है कि सिनेमाघरों में फिल्म के दौरान खड़े होने से प्रदर्शन में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। इसलिए इस परिस्थिति को औपचारिक सरकारी आयोजनों से अलग श्रेणी में रखा गया है।

शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका

दिशा-निर्देशों में स्कूलों और कॉलेजों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कहा गया है कि शैक्षणिक संस्थान सुबह की प्रार्थना सभाओं, राष्ट्रीय पर्वों और विशेष अवसरों पर ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन प्रोत्साहित करें। इसका उद्देश्य छात्रों में राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान और उसके ऐतिहासिक महत्व की समझ विकसित करना है। साथ ही, अनुशासन और गरिमा बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।

राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को संस्थागत रूप

विशेषज्ञों का मानना है कि इन दिशा-निर्देशों से ‘वंदे मातरम’ के प्रस्तुतीकरण को लेकर पहले से मौजूद अस्पष्टता समाप्त होगी। अलग-अलग आयोजनों में अब तक विभिन्न परंपराएं देखने को मिलती थीं, लेकिन अब एक समान प्रोटोकॉल लागू होने से एकरूपता आएगी। इससे यह संदेश भी जाएगा कि राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर सरकार एक स्पष्ट और औपचारिक व्यवस्था स्थापित करना चाहती है।

संतुलन का प्रयास

नए नियमों में जहां एक ओर औपचारिक कार्यक्रमों में खड़े होकर सम्मान देना अनिवार्य किया गया है, वहीं दूसरी ओर सिनेमा हॉल जैसे सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों के लिए व्यावहारिक छूट भी दी गई है। इसे राष्ट्रीय सम्मान और जनसुविधा के बीच संतुलन साधने का प्रयास माना जा रहा है।

सरकार का कहना है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य किसी पर अनावश्यक दबाव डालना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गीत के प्रति आदर की संस्कृति को स्पष्ट और सुव्यवस्थित रूप में स्थापित करना है।

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