Home » National » कांग्रेस ने खोली ट्रंप–मोदी ट्रेड डील की पोल

कांग्रेस ने खोली ट्रंप–मोदी ट्रेड डील की पोल

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 11 फरवरी 2026

हकीकत व्हाइट हाउस के पेपर में, सरकार बता रही कुछ और?

भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के व्हाइट हाउस द्वारा जारी फैक्ट शीट और आधिकारिक जॉइंट स्टेटमेंट के बीच गंभीर अंतर हैं, लेकिन केंद्र सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है। पार्टी का कहना है कि अमेरिकी दस्तावेज़ में जो शर्तें दर्ज हैं, वे भारत सरकार की सार्वजनिक व्याख्या से मेल नहीं खातीं। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि आखिर देश से क्या छिपाया जा रहा है?

जॉइंट स्टेटमेंट बनाम फैक्ट शीट: असली कहानी क्या है?

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि जॉइंट स्टेटमेंट में जिन मुद्दों का उल्लेख सीमित या अस्पष्ट था, उन्हें व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में विस्तार से दर्ज किया गया है। उदाहरण के तौर पर, कुछ दालों (pulses) और अन्य कृषि उत्पादों पर टैरिफ हटाने या कम करने का उल्लेख अमेरिकी दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से किया गया है। कांग्रेस पूछ रही है कि क्या मोदी सरकार ने वास्तव में कृषि क्षेत्र में टैरिफ में राहत देने का वादा किया है? अगर ऐसा है तो किसानों और संसद को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई?

500 बिलियन डॉलर की खरीद: ‘आशय’ से ‘प्रतिबद्धता’ तक?

विवाद का सबसे बड़ा बिंदु 500 बिलियन डॉलर के सामान की खरीद को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि जहां भारतीय पक्ष ने इसे संभावित व्यापार लक्ष्य या ‘आशय’ बताया, वहीं अमेरिकी फैक्ट शीट में इसे भारत की स्पष्ट ‘प्रतिबद्धता’ के रूप में पेश किया गया है। इतना ही नहीं, दस्तावेज़ में ऊर्जा, सूचना-प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों की बड़ी खरीद का जिक्र है। कांग्रेस का सवाल है कि क्या यह शब्दों का खेल है या वाकई भारत ने व्यापक खरीद का वादा किया है?

रूसी तेल और 25% टैरिफ का सवाल

व्हाइट हाउस दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख है कि अतिरिक्त 25% टैरिफ हटाने का निर्णय भारत की ओर से रूसी तेल खरीद रोकने की प्रतिबद्धता के संदर्भ में लिया गया। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या भारत ने वास्तव में ऐसा कोई आश्वासन दिया है? अगर यह सही है तो यह भारत की ऊर्जा और विदेश नीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। इस पर सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

कृषि पर संभावित असर और किसानों की चिंता

कांग्रेस का कहना है कि यदि भारत अमेरिकी दालों, सोयाबीन तेल, वाइन और अन्य कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करता है या हटाता है, तो इसका सीधा असर भारतीय किसानों पर पड़ेगा। घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। पार्टी ने मांग की है कि सरकार स्पष्ट करे कि इस समझौते में कृषि क्षेत्र से जुड़ी शर्तें क्या हैं और उनका किसानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

सरकार की चुप्पी पर सवाल

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया है—अगर अमेरिकी फैक्ट शीट में दर्ज बातें सही नहीं हैं तो भारत सरकार तुरंत खंडन क्यों नहीं करती? और अगर वे सही हैं, तो देश को पूरी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही? पार्टी ने इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बताया है और कहा है कि इतने बड़े व्यापारिक समझौते को लेकर अस्पष्टता लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।

दबाव की राजनीति या रणनीतिक समझौता?

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह डील किसी कूटनीतिक दबाव का परिणाम हो सकती है। उन्होंने पूछा कि क्या कृषि, ऊर्जा और डिजिटल कर जैसे मुद्दों पर अमेरिका के दबाव में आकर समझौता किया गया? क्या संसद को विश्वास में लिया गया? क्या राष्ट्रीय हितों पर व्यापक चर्चा हुई?

जवाबदेही की मांग और आगे की राह

कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार ट्रेड डील की सभी शर्तें सार्वजनिक करे और संसद में इस पर विस्तृत बहस कराए। पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते केवल आंकड़ों का खेल नहीं होते, बल्कि वे किसानों, उद्योगों और आम जनता की अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करते हैं। अब निगाहें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं—क्या वह फैक्ट शीट और जॉइंट स्टेटमेंट के कथित अंतर पर स्पष्ट जवाब देगी, या सियासी टकराव और तेज होगा?

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments