एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 11 फरवरी 2026
सोशल सिक्योरिटी कॉन्ट्रिब्यूशन से जुड़ा द्विपक्षीय एग्रीमेंट
भारत ने यूनाइटेड किंगडम और नॉर्दर्न आयरलैंड के साथ सोशल सिक्योरिटी योगदान (Social Security Contributions) से संबंधित एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एग्रीमेंट का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों में काम करने वाले पेशेवरों और कर्मचारियों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान (डबल कॉन्ट्रिब्यूशन) से राहत देना है। सरकार के अनुसार, यह कदम वैश्विक कार्यबल की बढ़ती आवाजाही को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। समझौते के तहत जो भारतीय या ब्रिटिश कर्मचारी अस्थायी तौर पर एक-दूसरे के देश में काम करने जाते हैं, उन्हें एक ही अवधि के लिए दोनों देशों में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा। अब वे अपने मूल देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में ही योगदान देंगे। इससे कर्मचारियों की आय पर अतिरिक्त बोझ कम होगा और कंपनियों की लागत भी घटेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था पेशेवरों के लिए विदेश में काम करना अधिक सहज बनाएगी।
प्रवासी पेशेवरों को बड़ा फायदा
ब्रिटेन में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर आईटी, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सेवाक्षेत्रों में कार्यरत हैं। इस समझौते से उन्हें विशेष लाभ मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें एक ही अवधि में दोहरी कटौती का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी प्रकार, भारत में काम करने वाले ब्रिटिश नागरिकों को भी सामाजिक सुरक्षा योगदान को लेकर स्पष्ट नियमों और पारदर्शिता का लाभ मिलेगा।
आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूती
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और सशक्त करेगा। प्रतिभा के आदान-प्रदान में आसानी आने से व्यापारिक संबंधों में नई गति आएगी। इसे भारत और ब्रिटेन के व्यापक रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी के ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो निवेश और सेवा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा।
निवेश और रोजगार को बढ़ावा
दोहरी सामाजिक सुरक्षा देनदारी समाप्त होने से कंपनियां विदेशी नियुक्तियों को लेकर अधिक सहज होंगी। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए मानव संसाधन प्रबंधन सरल होगा और निवेश का माहौल बेहतर बनेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता न केवल पेशेवरों के हित में है, बल्कि रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा।
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुआ यह सोशल सिक्योरिटी समझौता दोनों देशों के पेशेवरों, उद्योग जगत और निवेशकों के लिए एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। इससे कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और द्विपक्षीय संबंधों में भी नई ऊर्जा का संचार होगा।




