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विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी को समर्पित दिन: 11 फरवरी

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महिला और बालिका वैज्ञानिकों के योगदान को मिला वैश्विक सम्मान

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 11 फरवरी

हर साल 11 फरवरी को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला और बालिका विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) जैसे क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं की अहम भूमिका को पहचान देना और उन्हें प्रोत्साहित करना है। यह दिवस इस सच्चाई को रेखांकित करता है कि वैज्ञानिक शोध, नवाचार और सतत विकास में महिलाओं का योगदान न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि अनिवार्य भी है।

विज्ञान और नवाचार में महिलाओं की निर्णायक भूमिका

विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं ने चिकित्सा, अंतरिक्ष अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण, कृषि और डिजिटल तकनीक जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इसके बावजूद, आज भी दुनिया के कई हिस्सों में लड़कियों को वैज्ञानिक शिक्षा और शोध के समान अवसर नहीं मिल पाते। यह दिवस इसी असमानता को दूर करने और लड़कियों को विज्ञान की ओर प्रेरित करने का संदेश देता है।

संयुक्त राष्ट्र की पहल

यह दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित किया गया है, ताकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया जा सके। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के लिए महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी जरूरी है, खासकर विज्ञान और नवाचार जैसे क्षेत्रों में।

चुनौतियां और ज़मीनी हकीकत

हालांकि बीते वर्षों में हालात बेहतर हुए हैं, लेकिन आज भी वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक शोध और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। सामाजिक सोच, संसाधनों की कमी और अवसरों तक सीमित पहुंच जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। इस दिवस के जरिए सरकारों, शिक्षण संस्थानों और समाज से इन बाधाओं को दूर करने की अपील की जाती है।

आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा

अंतरराष्ट्रीय महिला और बालिका विज्ञान दिवस का सबसे बड़ा उद्देश्य आने वाली पीढ़ी की लड़कियों को यह विश्वास दिलाना है कि विज्ञान उनका भी क्षेत्र है। शिक्षा, मार्गदर्शन और अवसर मिलें तो वे न केवल वैज्ञानिक बन सकती हैं, बल्कि दुनिया की बड़ी समस्याओं के समाधान में नेतृत्व भी कर सकती हैं।

11 फरवरी का यह दिन केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि एक संदेश है—विज्ञान का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा, जब उसमें महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी होगी। महिला और बालिका वैज्ञानिकों को सम्मान देना दरअसल एक अधिक न्यायपूर्ण, नवोन्मेषी और टिकाऊ दुनिया की ओर कदम बढ़ाना है।

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