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Google पर ये सर्च करते ही बज जाता है खतरे का अलार्म—‘चाइल्ड पोर्न कंटेंट’ सबसे गंभीर अपराध, POCSO और IT कानूनों के तहत सख़्त सज़ा

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 8 फरवरी 2026

डिजिटल आज़ादी के साथ सबसे बड़ी कानूनी चेतावनी

आज के दौर में गूगल और इंटरनेट हमारी रोज़मर्रा की ज़रूरत बन चुके हैं, लेकिन साइबर कानून विशेषज्ञों की साफ़ चेतावनी है कि कुछ सर्च महज़ जिज्ञासा नहीं, सीधे अपराध मानी जाती हैं। खासकर बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेंट (Child Pornography/CSAM) इंटरनेट पर सबसे गंभीर अपराधों में शामिल है। भारत में ऐसे कंटेंट को देखना, खोजना, डाउनलोड करना, सेव करना या शेयर करना—सब समान रूप से दंडनीय है। अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में सिर्फ़ “बार-बार ऐसी सर्च दिखना” भी जांच की वजह बन सकता है।

चाइल्ड पोर्न कंटेंट: ‘देखना’ भी अपराध, बहाना नहीं चलेगा

कानून प्रवर्तन एजेंसियां स्पष्ट करती हैं कि बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट के मामले में इरादे की दलील कमजोर पड़ जाती है। “गलती से खुल गया”, “मज़ाक में देखा”, या “जिज्ञासा थी”—ये तर्क अक्सर स्वीकार नहीं होते। POCSO और IT कानूनों के तहत ऐसी सामग्री से जुड़ी किसी भी गतिविधि पर कठोर सज़ा, लंबी जेल और भारी जुर्माना संभव है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बार-बार ऐसी सर्च दिखना, भले ही डाउनलोड न किया गया हो, जांच एजेंसियों के रडार पर ला सकता है।

किन सर्च पर एजेंसियां तुरंत सतर्क हो जाती हैं

* जांच एजेंसियों के अनुसार, गूगल पर बार-बार या गंभीर रूप से

* बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेंट (CSAM),

* आतंकवाद/उग्रवाद से जुड़ी सामग्री,

* बम, हथियार या विस्फोटक बनाने की जानकारी,

* डार्क वेब के ज़रिए ड्रग्स, हथियार या फर्जी दस्तावेज़,

* हैकिंग, बैंक फ्रॉड और साइबर अपराध के तरीके जैसी खोजें खतरे का अलार्म बजा देती हैं। कई मामलों में सिर्फ़ सर्च पैटर्न ही जांच शुरू कराने के लिए काफ़ी माना जाता है।

डिजिटल सबूत कैसे बनते हैं—सर्च हिस्ट्री से IP तक

साइबर कानून विशेषज्ञ बताते हैं कि सर्च हिस्ट्री, IP एड्रेस, डिवाइस डिटेल, समय-मुहर (timestamps) और डिजिटल ट्रेल आज मज़बूत सबूत हैं। इंटरनेट पर की गई हर गतिविधि का कहीं न कहीं रिकॉर्ड रहता है। जांच के दौरान यही डेटा यह दिखाने के लिए इस्तेमाल होता है कि क्या खोजा गया, कितनी बार खोजा गया और किस डिवाइस/नेटवर्क से। अदालतें ऐसे डिजिटल सबूतों को गंभीरता से लेती हैं।

24×7 निगरानी: ‘कोई नहीं देख रहा’ सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी

पुलिस और साइबर सेल संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नज़र रखते हैं। कानूनी मांग पर सर्च इंजन, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म यूज़र डेटा उपलब्ध कराते हैं। इसलिए यह मानना कि “मैं अकेले सर्च कर रहा हूं” या “प्राइवेट मोड सुरक्षित है”—ख़तरनाक भ्रम हो सकता है। गोपनीयता सीमित है; कानून का दायरा व्यापक।

आम यूज़र क्या सावधानी बरतें—खासतौर पर बच्चों के मामले में

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गैरकानूनी, हिंसक या आपत्तिजनक विषयों से दूर रहें; किसी संदिग्ध लिंक/वेबसाइट पर क्लिक न करें; अनजान फ़ाइलें डाउनलोड न करें। बच्चों और किशोरों के इंटरनेट उपयोग पर निगरानी रखें, सुरक्षित सर्च/पैरेंटल कंट्रोल्स सक्रिय करें और डिजिटल खतरों पर खुलकर बात करें। अपनी सर्च हिस्ट्री और डिजिटल व्यवहार को हल्के में न लें—यही भविष्य में सबूत बन सकता है।

गूगल ज्ञान का साधन है, लेकिन गलत सर्च भारी पड़ सकती है

गूगल जानकारी का शक्तिशाली माध्यम है, पर गलत सवाल बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। एक सर्च, एक क्लिक या एक पल की लापरवाही कानून के लंबे शिकंजे में बदल सकती है—खासतौर पर चाइल्ड पोर्न कंटेंट के मामले में, जहां ज़ीरो-टॉलरेंस है। इसलिए इंटरनेट का इस्तेमाल सोच-समझकर करें—क्योंकि डिजिटल दुनिया में हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद रहता है।

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