आलोक कुमार | 31 जनवरी 2026
नई दिल्ली। सरकार के मुताबिक, देशभर के किसानों को अब तक 25 करोड़ से ज्यादा सॉयल हेल्थ कार्ड दिए जा चुके हैं। इस योजना का मकसद किसानों को उनकी मिट्टी की सही जानकारी देना है, ताकि खेती बेहतर हो और जमीन की सेहत लंबे समय तक बनी रहे। भारत सरकार ने यह योजना साल 2015 में शुरू की थी। सरकार का कहना है कि खेतों की मिट्टी में पोषक तत्व धीरे-धीरे कम हो रहे थे। इसी समस्या को समझते हुए सॉयल हेल्थ कार्ड योजना लाई गई, ताकि किसान जान सकें कि उनकी मिट्टी में किस चीज़ की कमी है और किस फसल के लिए क्या करना सही रहेगा।
आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 तक इस योजना के तहत 93 हजार से ज्यादा किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, 6 लाख से अधिक खेतों में प्रदर्शन और हजारों जागरूकता अभियान आयोजित किए गए। इससे किसानों तक योजना की जानकारी और लाभ बड़े पैमाने पर पहुंचा है।
सॉयल हेल्थ कार्ड हर दो साल में जारी किया जाता है। इसमें मिट्टी की पूरी रिपोर्ट होती है—जैसे पोषक तत्वों की मात्रा और मिट्टी की स्थिति। इसी रिपोर्ट के आधार पर किसान यह तय कर पाते हैं कि किस फसल में कितनी और किस तरह की खाद इस्तेमाल करनी चाहिए।
इस कार्ड के जरिए किसानों को रासायनिक खाद, जैविक खाद, जैव-उर्वरक और मिट्टी सुधारने के तरीकों की साफ और आसान सलाह मिलती है। इससे खेती का खर्च घटता है और पैदावार भी बेहतर होती है।
सरकार का मानना है कि सॉयल हेल्थ कार्ड योजना ने किसानों को सोच-समझकर फैसले लेने में मदद की है और टिकाऊ व सुरक्षित खेती की दिशा में यह एक मजबूत कदम साबित हो रही है।





