एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली/बीजिंग | 13 जनवरी 2026
चीन ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिससे भारत और चीन के रिश्तों में नई बेचैनी साफ नजर आने लगी है। चीन का कहना है कि वह पाकिस्तान तक जो सड़क बना रहा है, वह उसके अपने इलाके में ही बन रही है। चीन ने भारत की आपत्तियों को खारिज करते हुए शक्सगाम घाटी को अपना क्षेत्र बताया है। भारत ने इस पर कड़ा और साफ जवाब देते हुए कहा है कि शक्सगाम घाटी भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां चीन की मौजूदगी अवैध कब्जे के अलावा कुछ नहीं है।
भारत का कहना है कि यह मामला सिर्फ सड़क या विकास परियोजना का नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और सम्मान से जुड़ा हुआ गंभीर मुद्दा है। शक्सगाम घाटी कराकोरम क्षेत्र में स्थित है और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जाती है। यही वजह है कि यहां होने वाली हर गतिविधि भारत की सुरक्षा और कूटनीति से सीधे तौर पर जुड़ जाती है। भारत ने साफ कहा है कि किसी भी देश को भारतीय क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण करने या दावा जताने का कोई अधिकार नहीं है।
शक्सगाम घाटी आखिर है क्या?
शक्सगाम घाटी, जिसे ट्रांस-कराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है, जम्मू-कश्मीर का वह हिस्सा है जिस पर भारत का ऐतिहासिक और कानूनी दावा रहा है। वर्ष 1963 में पाकिस्तान ने एक समझौते के तहत इस इलाके को चीन को सौंप दिया था। भारत ने उस समझौते को कभी स्वीकार नहीं किया और आज भी उसे गैरकानूनी और अमान्य मानता है। भारत का स्पष्ट कहना है कि पाकिस्तान को यह अधिकार ही नहीं था कि वह भारतीय जमीन किसी तीसरे देश को दे दे।
भारत की स्थिति इस मुद्दे पर वर्षों से बिल्कुल स्पष्ट और अडिग रही है। भारत लगातार कहता आया है कि जम्मू-कश्मीर का हर हिस्सा भारत का है, चाहे वह किसी के भी कब्जे में क्यों न हो। भारत किसी भी बाहरी दावे या ऐसे समझौतों को मान्यता नहीं देता, जो उसकी क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ हों।
सड़क निर्माण बना नया विवाद
चीन द्वारा शक्सगाम घाटी में सड़क निर्माण की जानकारी सामने आने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। चीन का दावा है कि यह सड़क संपर्क बढ़ाने और विकास के लिए बनाई जा रही है। वहीं भारत का कहना है कि यह सड़क भारतीय क्षेत्र में बन रही है और इसके जरिए इलाके की मौजूदा स्थिति को बदलने की कोशिश की जा रही है।
भारत पहले ही चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का विरोध करता रहा है। भारत का मानना है कि यह परियोजना भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरती है, इसलिए यह उसकी संप्रभुता के खिलाफ है। शक्सगाम घाटी में सड़क निर्माण को भारत उसी रणनीति का हिस्सा मान रहा है, जिसमें धीरे-धीरे जमीनी हालात बदले जा रहे हैं।
भारत का साफ और कड़ा रुख
भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि शक्सगाम घाटी पर उसका दावा पूरी तरह वैध है और चीन का दावा पूरी तरह गलत और आधारहीन है। भारत का कहना है कि अवैध कब्जे को विकास या सड़क निर्माण के नाम पर सही नहीं ठहराया जा सकता। सरकार ने यह भी साफ किया है कि भारत अपनी सीमाओं, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
भारत का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—चाहे कितना भी अंतरराष्ट्रीय दबाव क्यों न हो, वह अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। कूटनीतिक स्तर पर भी भारत इस मुद्दे को मजबूती से उठाता रहेगा और अपनी बात दुनिया के सामने रखेगा।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
विशेषज्ञों का मानना है कि शक्सगाम घाटी को लेकर चीन का यह नया दावा भारत-चीन संबंधों में तनाव को और बढ़ा सकता है। पहले से ही सीमा विवाद, सैन्य तैनाती और बुनियादी ढांचे के निर्माण को लेकर दोनों देशों के बीच अविश्वास का माहौल बना हुआ है। ऐसे में इस तरह के बयान और गतिविधियां हालात को और संवेदनशील बना सकती हैं।
कुल मिलाकर, शक्सगाम घाटी एक बार फिर भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच बड़े भू-राजनीतिक टकराव का केंद्र बनती दिख रही है। यह मामला सिर्फ नक्शे की रेखाओं का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।




