स्पोर्ट्स डेस्क 9 जनवरी 2026
क्रिकेट में रोमांच की परिभाषा अगर बदलती है, तो ऐसे ही पलों से बदलती है। विजय हजारे ट्रॉफी के एक मुकाबले में दर्शकों ने ऐसा नज़ारा देखा, जिसे सालों तक याद रखा जाएगा। महाराष्ट्र और गोवा के बीच खेले गए इस मैच में गोवा की टीम को आखिरी ओवर में जीत के लिए सिर्फ 6 रन चाहिए थे। क्रीज़ पर सेट बल्लेबाज़ मौजूद थे और स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को लग रहा था कि मुकाबला अब गोवा की झोली में चला जाएगा। लेकिन तभी गेंद हाथ में आई रामकृष्ण घोष के—और कहानी पूरी तरह पलट गई। आखिरी ओवर में रामकृष्ण घोष ने जो किया, वह किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था। दबाव चरम पर था, एक भी गलती मैच छीन सकती थी, लेकिन इस युवा गेंदबाज़ ने छह की छह गेंदें ऐसी डालीं कि एक भी रन नहीं बन पाया। न चौका, न सिंगल, न वाइड—पूरा ओवर मेडन। जैसे ही अंतिम गेंद डॉट रही, महाराष्ट्र की टीम खुशी से झूम उठी और गोवा की उम्मीदें वहीं टूट गईं। महाराष्ट्र ने यह मैच 5 रन से जीत लिया।
मैच के पहले हिस्से की बात करें तो महाराष्ट्र ने बल्लेबाज़ी करते हुए 249 रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया था। गोवा की टीम ने लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार संघर्ष दिखाया और मुकाबला आखिरी ओवर तक ले आई। 49वें ओवर के बाद समीकरण साफ था—6 गेंद, 6 रन और 10 विकेट हाथ में। आमतौर पर ऐसे हालात में बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को फेवरेट माना जाता है, लेकिन रामकृष्ण घोष ने सारी गणनाएं गलत साबित कर दीं।
पूरे मैच में भी रामकृष्ण घोष का प्रदर्शन सराहनीय रहा। उन्होंने अपने 10 ओवर के स्पेल में किफायती गेंदबाज़ी करते हुए रन रोके, विकेट भी झटका और सबसे अहम—दबाव में टीम के लिए खड़े रहे। लेकिन जो काम उन्होंने आखिरी ओवर में किया, वही उन्हें रातों-रात चर्चा का विषय बना गया। क्रिकेट विशेषज्ञों और फैंस ने सोशल मीडिया पर इसे “अविश्वसनीय”, “जादुई” और “दुर्लभ कारनामा” बताया।
घरेलू क्रिकेट में आखिरी ओवर में 6 रन बचाना वैसे ही मुश्किल होता है, लेकिन उसे मेडन ओवर बना देना बेहद असाधारण माना जाता है। यही वजह है कि यह मुकाबला सिर्फ महाराष्ट्र की जीत नहीं, बल्कि गेंदबाज़ी के धैर्य, हिम्मत और आत्मविश्वास की जीत के रूप में देखा जा रहा है। रामकृष्ण घोष के इस प्रदर्शन ने न सिर्फ महाराष्ट्र को जीत दिलाई, घरेलू क्रिकेट को एक नया यादगार पल भी दे दिया—जिसे फैंस लंबे समय तक भूल नहीं पाएंगे।




