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यह अंत नहीं, लंबी लड़ाई की शुरुआत है: राहुल गांधी

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14 जनवरी 2024 को मणिपुर के थौबल से शुरू हुई कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ का समापन 20 मार्च 2024 को मुंबई में हुआ। इस 62 दिवसीय यात्रा ने देश के 14 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग 6,700 किलोमीटर की दूरी तय की। इस यात्रा ने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय को केंद्र में रखकर राहुल गांधी को एक बार फिर देश के कोने-कोने में लोगों से जोड़ने का अवसर दिया। यात्रा के समापन पर राहुल गांधी ने कहा, “यह अंत नहीं, बल्कि एक लंबी लड़ाई की शुरुआत है।” उन्होंने यह भी दोहराया कि इस देश की जनता को नफरत, अन्याय और तानाशाही से मुक्ति दिलाने के लिए यह संघर्ष आगे और तेज़ होगा।

इस यात्रा का समापन वैसे तो 20 मार्च को हुआ, लेकिन 16 मार्च 2024 को मुंबई में एक एक दिवसीय प्रतीकात्मक पदयात्रा निकाली गई, जिससे अंतिम चरण को जनसंपर्क से जोड़ा गया। राहुल गांधी ने इस अवसर पर कहा कि न्याय यात्रा केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, महिलाओं और युवाओं के साथ खड़े होने का एक ऐतिहासिक संकल्प है। मुंबई की सड़कों पर जब राहुल गांधी हजारों समर्थकों के साथ पदयात्रा करते नज़र आए, तो यह दृश्य महज़ एक राजनीतिक रैली नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और संविधानिक चेतना का एक प्रतीक बन गया।

इस पूरी यात्रा में राहुल गांधी ने हर पड़ाव पर एक ही बात दोहराई—“डरो मत, सहो मत”। यह यात्रा उस भारत की तस्वीर पेश करती है जो जातिगत जनगणना की माँग करता है, जो आर्थिक संसाधनों के न्यायसंगत बंटवारे की बात करता है और जो संविधान को सर्वोच्च मानते हुए लोकतंत्र की रक्षा की शपथ लेता है। यात्रा के दौरान उन्होंने यह भी वादा किया कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस जातिगत जनगणना कराएगी और सामाजिक न्याय को नीति का हिस्सा बनाएगी।

मणिपुर से शुरू होकर नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, और महाराष्ट्र तक फैली इस यात्रा ने ना सिर्फ राहुल गांधी की ज़मीनी पकड़ को मज़बूत किया बल्कि कांग्रेस संगठन को भी प्रेरणा और ऊर्जा दी। मुंबई के समापन समारोह में राहुल गांधी ने साफ़ कहा कि यह यात्रा उन्हें भारत की आत्मा से जोड़ने का एक अनुभव रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आज भारत को केवल राजनीतिक नहीं, “न्यायिक क्रांति” की ज़रूरत है।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारत जोड़ो न्याय यात्रा ने देश की राजनीति में फिर से पदयात्राओं के महत्व को पुनर्स्थापित किया है। यह यात्रा ‘भारत जोड़ो’ की अगली कड़ी थी, लेकिन इस बार संदेश और भी मुखर था—”भारत को न्याय चाहिए, समानता चाहिए, और संविधान की रक्षा चाहिए।” राहुल गांधी ने अंत में यह भी संकेत दिया कि यह यात्रा लोकसभा चुनाव 2024 से पहले जनता से प्रत्यक्ष जुड़ाव का सबसे बड़ा माध्यम रही, और अब वह इस जुड़ाव को संघर्ष और क्रांति में बदलने को तैयार हैं।

यदि यह यात्रा उनके लिए एक राजनीतिक परियोजना थी, तो इसका निष्कर्ष यह है कि यह परियोजना अब स्थायी आंदोलन की शक्ल लेने को तैयार है। भारत जोड़ो न्याय यात्रा अब एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन के रूप में कांग्रेस पार्टी के वैचारिक पुनर्गठन का आधार बन चुकी है।

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