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उत्तराखंड में सनसनी: एक्ट्रेस उर्मिला के नाम से देहरादून SSP को पत्र, जान का खतरा बताकर लगाए गंभीर आरोप

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शैलेन्द्र नेगी| देहरादून 3 जनवरी 2026

उत्तराखंड की राजनीति और अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा एक नया और सनसनीखेज मामला सामने आया है। देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को एक्ट्रेस उर्मिला के नाम से लिखा गया एक पत्र सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इस पत्र में दावा किया गया है कि अंकिता भंडारी मर्डर केस से जुड़े अहम खुलासे ऑडियो के ज़रिए किए गए थे, जिनमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम और अन्य वीआईपी लोगों के नाम सामने आए थे। पत्र लिखने वाली महिला का कहना है कि इन खुलासों के बाद से उसकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

पत्र में साफ़ शब्दों में लिखा गया है कि वह पिछले कई सालों से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं और सच सामने लाने की वजह से अब उन्हें लगातार दबाव और डर का सामना करना पड़ रहा है। आरोप लगाया गया है कि खुलासों के बाद न सिर्फ़ उन्हें धमकियां मिल रही हैं, बल्कि स्थानीय पुलिस भी उन्हें परेशान कर रही है। पत्र में यह भी कहा गया है कि पुलिस से सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन उल्टा हालात और कठिन बना दिए गए हैं, जिससे डर और बढ़ गया है।

इस पत्र का सबसे गंभीर हिस्सा वह चेतावनी है, जिसमें लिखा गया है कि अगर उन्हें या उनके परिवार को कुछ भी होता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर उत्तराखंड पुलिस, बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम, सुरेश राठौर और अजय कुमार को जिम्मेदार माना जाए। इस बयान ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर सत्ता, पुलिस और प्रभावशाली नेताओं पर आरोप लगाए गए हैं। पत्र में यह भी संकेत दिया गया है कि सच्चाई सामने आने से कुछ ताकतवर लोग असहज हैं और इसी वजह से दबाव बनाया जा रहा है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड पहले ही उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा मुद्दा रहा है। इस नए पत्र के सामने आने के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस मामले में सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हुई है या नहीं। विपक्ष और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति जान का खतरा बताते हुए इतने गंभीर आरोप लगा रहा है, तो प्रशासन को इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और तत्काल सुरक्षा व स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।

निगाहें उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस पत्र को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या पत्र लिखने वाली महिला को सुरक्षा दी जाएगी? क्या लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? या फिर यह मामला भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, इस पत्र ने एक बार फिर अंकिता भंडारी केस से जुड़े सवालों को ज़िंदा कर दिया है और राज्य की कानून-व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

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