अंतरराष्ट्रीय डेस्क 1 जनवरी 2026
यमन में चल रहे लंबे और जटिल संघर्ष के बीच एक अहम मोड़ सामने आया है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने यमन से अपनी सेनाएँ वापस बुलाने का फैसला किया है। यह कदम सऊदी अरब द्वारा दिए गए 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद उठाया गया, जिसकी पुष्टि रॉयटर्स वर्ल्ड न्यूज़ पॉडकास्ट की ताज़ा रिपोर्ट में की गई है। कभी हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक ही मोर्चे पर खड़े सऊदी अरब और यूएई के बीच बीते कुछ समय से रणनीतिक मतभेद गहराते जा रहे थे। यमन के दक्षिणी इलाकों में प्रभाव, बंदरगाहों पर नियंत्रण और स्थानीय गुटों को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताएँ अलग-अलग होती चली गईं। यही तनाव अब खुले तौर पर सामने आ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया था कि अगर यूएई अपनी सैन्य मौजूदगी पर पुनर्विचार नहीं करता, तो रिश्तों में और कड़वाहट आ सकती है। इसके बाद अबू धाबी ने टकराव से बचने के लिए पीछे हटने का रास्ता चुना और यमन से अपनी सेनाएँ निकालने का निर्णय लिया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक संतुलन से जुड़ा हुआ है। यूएई पहले ही कई बार कह चुका है कि वह यमन युद्ध में अपनी भूमिका सीमित करना चाहता है, लेकिन इस बार की वापसी खाड़ी क्षेत्र में बदलते समीकरणों की ओर साफ़ इशारा करती है।
यमन में जारी मानवीय संकट के बीच यह घटनाक्रम यह भी दिखाता है कि क्षेत्रीय शक्तियों के आपसी मतभेद युद्ध को और उलझा रहे हैं। सवाल अब यह है कि यूएई की वापसी से यमन में स्थिरता आएगी या संघर्ष एक नई दिशा लेगा।




