महेंद्र कुमार | नई दिल्ली 23 दिसंबर 2025
नई दिल्ली। सेना के वरिष्ठ अधिकारी कर्नल दीपक शर्मा की 2 करोड़ 36 लाख रुपये नकद के साथ गिरफ्तारी ने देश को झकझोर दिया है। यह मामला सिर्फ एक अफसर की घूसखोरी तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और संदिग्ध रिश्तों तक जुड़ते नजर आ रहे हैं। सीबीआई ने इस मामले में दुबई स्थित कंपनी DP WORLD के इंडिया ऑपरेशन के निदेशक और इंडिया हेड के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है, जिससे पूरे प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। DP WORLD वही कंपनी है, जिसके चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलेयम का नाम कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ रिश्तों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादों में रहा है। रिपोर्टों और आरोपों के मुताबिक, ठेके हासिल करने के लिए गलत तरीकों का सहारा लिया गया और एपस्टीन जैसे व्यक्ति का प्रभाव और नेटवर्क इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि एपस्टीन से जुड़े बेहद गंभीर और आपत्तिजनक दावों ने इस कंपनी की छवि पर पहले से ही सवाल खड़े कर रखे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि DP WORLD भारत में किस रास्ते से और किन सहारों के जरिए दाखिल हुई? क्या इसके पीछे किसी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण था? कर्नल दीपक शर्मा के अलावा और कौन-कौन लोग इस नेटवर्क से जुड़े थे? क्या सिर्फ पैसों का लेन-देन हुआ या इसके बदले और सुविधाएं भी दी गईं? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब देश की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से बेहद जरूरी है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विदेशी कंपनियों की भूमिका और उनके संपर्कों की गहन जांच कितनी जरूरी है। जानकारों का मानना है कि अब सीबीआई को सिर्फ एक अफसर तक सीमित न रहते हुए DP WORLD और उससे जुड़े सभी सौदों, संपर्कों और लेन-देन की व्यापक जांच करनी चाहिए, ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके और देश के साथ कोई समझौता न हो।





