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प्रसार भारती की ‘कर्ली’ कहानी: करोड़ों का DD प्रोजेक्ट, यूट्यूब इंफ्लुएंसर और नियमों को मोड़ती फाइलें

एबीसी डेस्क 17 दिसंबर 2025

देश के सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी मीडिया, निजी प्रोडक्शन हाउस और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर इकोसिस्टम के रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह कहानी है डीडी नेशनल पर प्रसारित डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ ‘India in Motion’ की, जिसकी एंकरिंग मशहूर ट्रैवल इंफ्लुएंसर कामिया जानी (Curly Tales) ने की थी। बाहर से यह एक सामान्य सरकारी प्रचार परियोजना दिखती है, लेकिन अंदर झांकने पर यह मामला नियमों के उल्लंघन, कागज़ी खेल और असामान्य समझौतों का जाल बन जाता है।

मार्च 2024 में जब डीडी नेशनल पर ‘India in Motion’ का प्रीमियर हुआ, तो इसमें मोदी सरकार के सड़क, रेलवे और विमानन क्षेत्र में किए गए कार्यों को दिखाया गया। लेकिन प्रसारण के कुछ ही घंटों के भीतर वही एपिसोड निजी यूट्यूब चैनलों पर भी दिखाई देने लगे। यही वह बिंदु था, जहां से विवाद की शुरुआत हुई। सवाल उठा कि सरकारी पैसे से बने कंटेंट को निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किस अधिकार से डाला गया?

इस पूरे प्रोजेक्ट के केंद्र में है ₹6.09 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट, दो मीडिया कंपनियां और कामिया जानी के पति सम्मर वर्मा। औपचारिक तौर पर यह ठेका Softline Studio Services Limited को दिया गया था, जिसे सात सदस्यीय चयन समिति ने बैठकों और प्रेज़ेंटेशन के बाद चुना था। लेकिन असल में इस प्रोजेक्ट को अंजाम दिया गया Fork Media Group से जुड़े लोगों द्वारा, जिसके डायरेक्टर और CEO खुद सम्मर वर्मा हैं। यह सीधा-सीधा प्रसार भारती के नियमों का उल्लंघन माना जाता है, क्योंकि उसके कॉन्ट्रैक्ट नियम किसी तीसरे पक्ष को काम सौंपने की इजाजत नहीं देते।

मामला यहीं खत्म नहीं होता। जिस कंटेंट का निर्माण सरकारी चैनल के लिए किया गया, वही कंटेंट बाद में Curly Tales और Mashable India जैसे निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दोबारा अपलोड कर दिया गया। यह न सिर्फ कॉपीराइट नियमों का उल्लंघन था, बल्कि तीसरे पक्ष के इस्तेमाल से जुड़े नियमों के भी खिलाफ था। खुद प्रसार भारती की आंतरिक आपत्तियों में इस बात को स्वीकार किया गया कि नियमों को तोड़ा गया है।

सबसे हैरान करने वाला पहलू तो कागज़ी कार्रवाई का है। जिस प्रोजेक्ट में नियमों का उल्लंघन मार्च 2024 में सामने आ चुका था, उससे जुड़े अहम दस्तावेज — वर्क कंप्लीशन लेटर, एग्रीमेंट और इंडेम्निटी बॉन्ड — सब एक ही दिन, 17 मई 2024 को साइन किए गए। यानी कंटेंट बन चुका था, प्रसारित भी हो चुका था, यूट्यूब पर डाला भी जा चुका था, लेकिन उसे वैध बनाने वाले कागज़ बाद में तैयार किए गए। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या नियमों को बाद में कवर करने के लिए कागज़ी औपचारिकताएं पूरी की गईं?

यह पूरा मामला यह दिखाता है कि कैसे करदाताओं के पैसे से बने सरकारी प्रोजेक्ट्स को सोशल मीडिया रीच और इंफ्लुएंसर ब्रांडिंग के साथ जोड़ दिया गया। एक तरफ सरकारी चैनल, दूसरी तरफ निजी यूट्यूब एम्पायर — और बीच में नियम, जो जरूरत के हिसाब से मोड़े गए। यह सिर्फ एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ का मामला नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम की झलक है, जहां सरकारी मीडिया और निजी डिजिटल प्रभावशाली चेहरों की सीमाएं धुंधली होती जा रही हैं।

कुल मिलाकर, ‘India in Motion’ सिर्फ सड़कों, रेलवे और हवाईअड्डों की कहानी नहीं है। यह कहानी है प्रसार भारती की कार्यप्रणाली, सरकारी धन के इस्तेमाल और उस तंत्र की, जहां पहुंच, प्रभाव और लोकप्रियता नियमों से बड़ी होती दिखती है। यह मामला अब केवल एक मीडिया प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि सार्वजनिक जवाबदेही और पारदर्शिता का गंभीर सवाल बन चुका है।

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