Home » National » स्टालिन : केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग उजागर, गांधी परिवार बेगुनाह साबित

स्टालिन : केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग उजागर, गांधी परिवार बेगुनाह साबित

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी डेस्क 16 दिसंबर 2025

नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली की अदालत द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार किए जाने के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। इस फैसले को विपक्ष ने मोदी सरकार की “राजनीतिक बदले की राजनीति” पर न्यायपालिका की स्पष्ट टिप्पणी के रूप में देखा है। अदालत के इस कदम के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल लगातार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने, डराने और बदनाम करने के लिए किया जा रहा है, लेकिन हर बार अदालतों में ऐसे मामलों की पोल खुल जाती है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड केस में न्यायपालिका ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि किस तरह यूनियन BJP सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाती है। स्टालिन ने कहा कि बिना किसी ठोस कानूनी आधार के ऐसे मामलों को आगे बढ़ाया जाता है, जिनका असली मकसद केवल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करना और उनकी छवि खराब करना होता है। उनके अनुसार, यह फैसला उस सच्चाई की पुष्टि करता है, जिसे विपक्ष लंबे समय से कहता आ रहा है।

एम.के. स्टालिन ने अपने बयान में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चाई उनके साथ है और वे बिना किसी डर के इस राजनीतिक उत्पीड़न का सामना करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि गांधी परिवार को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों पर मजबूती से खड़े हैं—ऐसे मूल्य, जिन्हें BJP बर्दाश्त नहीं कर पा रही है।

स्टालिन ने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार अपनाई जा रही इस “वेंडेटा-ड्रिवन” यानी बदले की राजनीति ने देश की प्रमुख जांच एजेंसियों की साख को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि जब जांच संस्थानों को निष्पक्ष और स्वतंत्र रहने के बजाय राजनीतिक डराने-धमकाने के औज़ार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे न केवल लोकतंत्र कमजोर होता है, बल्कि संस्थानों पर जनता का भरोसा भी टूटता है। उनके मुताबिक, यह प्रवृत्ति भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए बेहद खतरनाक है।

कांग्रेस ने भी अदालत के फैसले को “सच की जीत” बताते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड केस में शुरुआत से ही कोई आपराधिक तथ्य नहीं था। पार्टी का आरोप है कि वर्षों तक इस मामले को जानबूझकर जिंदा रखा गया, ताकि मीडिया ट्रायल के ज़रिये विपक्षी नेतृत्व को बदनाम किया जा सके और राजनीतिक लाभ लिया जा सके। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि न तो किसी तरह की अवैध कमाई साबित हुई, न ही निजी लाभ का कोई प्रमाण सामने आया, फिर भी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक सवाल को भी सामने लाता है कि क्या देश की केंद्रीय जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम कर पा रही हैं या फिर सत्ता के इशारों पर। नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत का रुख विपक्ष के उस आरोप को बल देता है कि कानून का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार की तरह किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, दिल्ली कोर्ट का यह फैसला मोदी सरकार और ED के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र, संविधान और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की जीत के रूप में पेश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और अधिक राजनीतिक बहस का केंद्र बनने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष इसे सत्ता के दुरुपयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के बड़े सवाल से जोड़कर देख रहा है।

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments