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समर्थन भी, सवाल भी: ‘जी राम जी’ ग्रामीण रोजगार बिल पर TDP की दो-टूक

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एबीसी डेस्क 16 दिसंबर 2025

भारत सरकार ने संसद में ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ अर्थात VB-G RAM G विधेयक, 2025 पेश कर दिया है, जिसका उद्देश्य दो दशक से चल रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को नए रूप में बदलना है। विधेयक की प्रतियां संसद सदस्यों को वितरित की गई हैं और सत्र के दौरान इसके विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा भी शुरू हो गयी है।

इस बिल के प्रति भाजपा के सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने अपनी प्रारंभिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इसे समर्थन देने का विचार रखता है, लेकिन महत्वपूर्ण वित्तीय और लागू करने योग्य पहलुओं पर गंभीर आशंका भी जताई है। आंध्र प्रदेश के वित्त, योजना व विधायी कार्य मंत्री पय्यावुला केशव ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि TDP राज्य सरकार बिल के प्रावधानों का अध्ययन करेगी और उसके अनुसार समर्थन एवं कार्यान्वयन के निर्णय करेगी।

केशव ने स्पष्ट किया कि वित्तपोषण और लागत साझा व्यवस्था इस विधेयक का वह पहलू है जो विशेष रूप से चिंता उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकार के बीच फंड के वितरण में राज्य पर अधिक बोझ आ जाता है, तो यह उन राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो नकदी या संसाधन-विहीन हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि TDP पूरी तरह से प्रतिवेदन नहीं पढ़ने के बाद कोई अंतिम निर्णय नहीं लेगी, फिर भी प्रारंभिक तौर पर यह चिंता जताई जा रही है।

वर्तमान में मनरेगा के तहत मजदूरों के वेतन का पूरा भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है, लेकिन नए VB-G RAM G विधेयक में यह व्यवस्था बदली गयी है और अब राज्यों को मजदूरी भुगतान में हिस्सेदारी करनी होगी। विधेयक के अनुसार केंद्र एवं राज्य के बीच धन का वितरण आम राज्यों के लिए 60:40 तथा उत्तर-पूरब, हिमालयी और कुछ केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए 90:10 के अनुपात में किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि अब राज्यों को कुल मजदूरी का लगभग 40 प्रतिशत राशि स्वयं वहन करनी होगी, जो कई बड़े एवं मध्यम राज्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ का कारण बन सकता है।

TDP की प्रतिक्रिया के साथ ही विपक्षी दलों ने भी इस विधेयक पर अलग-अलग सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने विशेषकर मनरेगा का नाम और महात्मा गांधी का नाम हटाने पर सरकार पर निशाना साधा है, इसे योजना की असली भावना से हटने वाला कदम बताया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि सिर्फ नाम बदलने या वित्तीय ढांचे में बदलाव करने से योजना का मूल उद्देश्य कमजोर नही होना चाहिए और इससे संबंधित अन्य खर्चों का विचार भी किया जाना चाहिए।

जहाँ सरकार इस विधेयक को ग्रामीण रोजगार की नई दिशा और आधुनिक अनुमानित रोजगार गारंटी के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं सहयोगी दलों की प्रारंभिक प्रतिक्रिया में वित्तीय साझेदारी और राज्यों पर पड़ने वाले बोझ को लेकर स्पष्ट चिंता और शर्तें देखी जा रही हैं। अब यह देखने वाली बात है कि आगे की चर्चा, संसदीय बहस और राज्यों की प्रतिक्रियाएँ इस विधेयक को किस दिशा में ले जाती हैं।

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