समी अहमद। 15 दिसंबर 2025
बिहार की राजनीति में एक बार फिर जबरदस्त भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान महिला डॉक्टर के साथ आपत्तिजनक और असंवेदनशील व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि नियुक्ति पत्र लेने मंच पर आई महिला डॉक्टर के हिजाब को लेकर मुख्यमंत्री ने ऐसी हरकत की, जिसे न केवल असभ्य बल्कि महिला सम्मान और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया जा रहा है। इस घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है और पूरे मामले को सत्ता के घमंड व संवेदनहीनता का प्रतीक करार दिया है।
राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि बिहार के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति अगर सार्वजनिक मंच पर किसी महिला की धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत गरिमा से इस तरह खिलवाड़ करता है, तो यह पूरे राज्य के लिए शर्मनाक है। तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री ही महिलाओं के सम्मान को लेकर लापरवाह नजर आते हैं, तो राज्य में आम महिलाओं की सुरक्षा और इज्जत की क्या स्थिति होगी। उन्होंने इस घटना को व्यक्तिगत भूल नहीं, बल्कि सत्ता की उस मानसिकता का उदाहरण बताया जो जवाबदेही से मुक्त समझने लगी है।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यह घटना नीतीश कुमार की बदली हुई राजनीति और वैचारिक रुख को भी उजागर करती है। कभी सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और महिला सशक्तिकरण की राजनीति करने वाले मुख्यमंत्री पर अब आरोप लग रहे हैं कि वे उसी राजनीति के मूल्यों को खुद ही कमजोर कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के व्यवहार से अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा की भावना गहराती है और यह संदेश जाता है कि सत्ता में बैठे लोग भी संवेदनशीलता और मर्यादा की सीमाओं को पार कर सकते हैं।
महिला अधिकार संगठनों ने भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि किसी महिला के पहनावे या धार्मिक पहचान से छेड़छाड़ करना न सिर्फ व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन भी है। इन संगठनों का तर्क है कि मुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठे व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह समाज के हर वर्ग के लिए सम्मान और सुरक्षा का उदाहरण पेश करे, न कि विवाद और अपमान का कारण बने।
मामले के तूल पकड़ने के साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि यह मामला किसी स्पष्टीकरण या औपचारिक माफी से खत्म नहीं हो सकता, क्योंकि यह सार्वजनिक मंच पर हुआ ऐसा आचरण है जो सत्ता की संवेदनहीनता को उजागर करता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री या राज्य सरकार इस विवाद पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है और क्या इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने आती है या नहीं।




