आलोक कुमार | नई दिल्ली, 14 दिसंबर 2025
सत्य बनाम सत्ता की खुली जंग: राहुल गांधी ने रामलीला मैदान से बीजेपी आरएसएस की धज्जियां उड़ाई
दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को कांग्रेस के नेता विपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और RSS पर अब तक का सबसे आक्रामक और सीधा राजनीतिक हमला बोला। हजारों लोगों की मौजूदगी में राहुल गांधी ने न सिर्फ संसद के हालिया घटनाक्रम का जिक्र किया, बल्कि बीजेपी की सत्ता-राजनीति, कथित “वोट चोरी”, लोकतंत्र की स्थिति और विचारधारा की लड़ाई को केंद्र में रखते हुए सरकार की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका हमला सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि सत्ता के आत्मविश्वास पर सीधा वार था—और वह बार-बार यह कहते दिखे कि बीजेपी का डर अब साफ दिखाई देने लगा है। राहुल गांधी ने कहा, “हमारी विचारधारा सत्य है और BJP/बीजेपी की विचारधारा सत्ता है। सत्ता उनके हाथ से फिसल रही है, इसलिए वे घबराए हुए हैं। हम सत्य के साथ खड़े होकर उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंकेंगे।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि अब उनके चेहरे पर आत्मविश्वास नहीं, बल्कि घबराहट साफ झलकती है। “नरेंद्र मोदी का चेहरा देखिए, आपको खुद पता चल जाएगा कि उनका कॉन्फिडेंस खत्म हो चुका है।” राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री जानते हैं कि उनकी “वोट चोरी” की राजनीति पकड़ी जा चुकी है। यह सीधा आरोप चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर था, जिसे राहुल गांधी लगातार संसद और सार्वजनिक मंचों से उठा रहे हैं। उनका कहना था कि जब सवाल पूछे जाते हैं, जब जवाब मांगे जाते हैं, तब बीजेपी सरकार चर्चा से भागती है और असली मुद्दों को दबाने की कोशिश करती है।
राहुल गांधी ने संसद में गृहमंत्री अमित शाह के व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा कि “आप सबने देखा होगा कि सदन में अमित शाह का हाथ कांप रहा था।” उन्होंने इस दृश्य को सत्ता के डर से जोड़ते हुए कहा कि अमित शाह और बीजेपी के बड़े नेता तभी तक बहादुर हैं, जब तक उनके हाथ में सत्ता है। “जिस दिन सत्ता गई, उसी दिन इनकी बहादुरी भी खत्म हो जाएगी”—यह टिप्पणी सीधे-सीधे बीजेपी की कथित ताकत की राजनीति पर प्रहार थी। राहुल गांधी का आरोप था कि सत्ता के सहारे डर और दबाव की राजनीति करने वालों के लिए अब जनता का फैसला ही सबसे बड़ा डर बन चुका है।
राहुल गांधी का हमला केवल सत्ता और चुनाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे एक गहरी वैचारिक लड़ाई बताया। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि गांधी जी के लिए सत्य सबसे बड़ी शक्ति था। भारतीय परंपरा में “सत्यम शिवम् सुंदरम्” और “सत्यमेव जयते” जैसे मूल मंत्र सत्य को सर्वोच्च स्थान देते हैं। इसके उलट, राहुल गांधी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के कथित विचारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके अनुसार दुनिया सत्य को नहीं, शक्ति को देखती है—जिसके पास शक्ति है, वही सही माना जाता है। राहुल गांधी ने इसे RSS की मूल सोच बताते हुए कहा कि यह विचारधारा सत्य नहीं, बल्कि सत्ता को सबसे ऊपर रखती है, और यही सोच बीजेपी की राजनीति की आत्मा बन चुकी है।
राहुल गांधी ने इस टकराव को साफ शब्दों में परिभाषित किया—“आज देश में लड़ाई सत्य और असत्य के बीच है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और RSS की राजनीति सत्य को कमजोर कर सत्ता को सर्वोपरि मानती है, जबकि कांग्रेस और विपक्ष सत्य के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार बदलने की लड़ाई नहीं है, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और नैतिक मूल्यों को बचाने की निर्णायक जंग है। “हम सत्य को लेकर नरेंद्र मोदी, अमित शाह और RSS की सरकार को हिंदुस्तान से हटाएंगे”—यह वाक्य उनके भाषण का सबसे आक्रामक और राजनीतिक रूप से स्पष्ट ऐलान माना जा रहा है।
रामलीला मैदान में दिया गया यह भाषण कांग्रेस की चुनावी रणनीति और वैचारिक मोर्चेबंदी का साफ संकेत माना जा रहा है। राहुल गांधी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि बीजेपी की ताकत डर और सत्ता पर टिकी है, जबकि विपक्ष जनता, सत्य और लोकतांत्रिक मूल्यों के सहारे लड़ाई लड़ रहा है। उनके शब्दों में यह भरोसा भी झलका कि सत्ता का डर अब सत्ता में बैठे लोगों को ही सताने लगा है। यह भाषण न सिर्फ बीजेपी पर हमला था, बल्कि आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति के और ज्यादा तीखे, ध्रुवीकरण वाले और निर्णायक होने का संकेत भी दे रहा है।
अपने भाषण के अंतिम हिस्से में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी जैसे चुनाव आयुक्त सत्य–असत्य की इस निर्णायक लड़ाई में निष्पक्ष रहने के बजाय बीजेपी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने इन चुनाव आयुक्तों को बचाने के लिए कानून तक बदल दिया, ताकि वे जो चाहें करें और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न हो सके। राहुल गांधी ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता में आने पर कांग्रेस इस संरक्षण देने वाले कानून को रेट्रोएक्टिव तरीके से बदलेगी और लोकतंत्र से खिलवाड़ करने वाले इन चुनाव आयुक्तों के खिलाफ कड़ी और उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाएगी।





