अंतरराष्ट्रीय डेस्क 12 दिसंबर 2025
भारत ने चीन के बिज़नेस प्रोफेशनलों के लिए वीज़ा मंज़ूरी प्रक्रिया तेज़ करने का जो फैसला लिया है, उसे चीन ने सकारात्मक कदम बताते हुए गर्मजोशी से स्वागत किया है। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियाँ कई तरह की बाधाओं और तनावों से प्रभावित थीं, ऐसे में भारत द्वारा यह प्रक्रिया आसान करना दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई गति दे सकता है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के इस कदम को “सकारात्मक और उत्साहजनक” रूप में लिया है और उम्मीद है कि इससे व्यापार और निवेश के अवसरों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
रिपोर्टों के अनुसार, भारत अब चीनी बिज़नेस प्रोफेशनलों को कम समय में, कम कागजी कार्रवाई के साथ, और अधिक पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए वीज़ा जारी करेगा। इसमें उन लोगों को फायदा होगा जो कम अवधि के लिए भारत में व्यापारिक यात्रा, मीटिंग्स, तकनीकी परामर्श या निवेश से जुड़े मामले निपटाने आते हैं। चीन का कहना है कि इस फैसले से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच बेहतर संपर्क बनेगा और लंबे समय से अटकी हुई कई व्यावसायिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में आसानी होगी।
पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के संबंधों में राजनीतिक और सीमाई तनावों के कारण व्यापारिक माहौल में कई रुकावटें आईं। कई चीनी कंपनियों को भारत में संचालन के लिए अतिरिक्त मंजूरियों की जरूरत पड़ रही थी और वीज़ा प्रक्रिया भी काफी धीमी हो गई थी। चीन का मानना है कि भारत की यह नई पहल इन अवरोधों को कुछ हद तक कम कर सकती है। चीन ने यह भी कहा कि ऐसा कदम दोनों देशों के बीच “विश्वास बहाली” की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि व्यापारिक साझेदारी अक्सर राजनीतिक तनाव को कम करने का भी मार्ग बनती है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि व्यावसायिक संपर्क बढ़ाने से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि तकनीकी सहयोग, निवेश और संयुक्त परियोजनाएँ भी रफ्तार पकड़ेंगी। चीन का यह भी कहना है कि भारत और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ हैं, और उनके बीच मजबूत आर्थिक रिश्ते पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए भी फायदेमंद हो सकते हैं। उन्होंने आशा जताई कि भारत आगे भी ऐसे कदम उठाएगा जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करें और व्यापारिक माहौल को अधिक अनुकूल बनाएं।
भारतीय अधिकारियों के अनुसार यह फैसला इस सोच के तहत लिया गया है कि व्यापारिक गतिविधियों में अनावश्यक देरी भारत की निवेश छवि को प्रभावित करती है। भारतीय उद्योग जगत भी लंबे समय से मांग कर रहा था कि वीज़ा प्रक्रिया को आसान किया जाए, जिससे वैश्विक कंपनियाँ भारतीय बाजार में आसानी से काम कर सकें। चीन ने इसे भारत की “उदार और व्यावहारिक नीति” कहा है, और उम्मीद जताई है कि यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को एक नया अध्याय देगा।
कुल मिलाकर, भारत का यह फैसला दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नया प्रोत्साहन देने वाला है। यह कदम ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक चुनौतियाँ बढ़ रही हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच सहयोग बढ़ना न केवल दोनों देशों के हित में है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।




