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जर्मनी का आरोप—रूस ने एयर ट्रैफिक सिस्टम हैक किया, चुनाव में दखल की कोशिश… मॉस्को का इंकार

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क 12 दिसंबर 2025

जर्मनी ने रूस पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उसने जर्मनी के एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम पर साइबर हमला किया और देश के फेडरल चुनावों में दखल देने की भी कोशिश की। इन आरोपों के बाद जर्मनी ने बर्लिन में तैनात रूसी राजदूत को तलब किया है। जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि अगस्त 2024 में जर्मनी के एयर ट्रैफिक कंट्रोल नेटवर्क पर हुए साइबर हमले के पीछे रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी शामिल थी। सरकार का कहना है कि रूस का मकसद सिर्फ सिस्टम को निशाना बनाना नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को गलत दिशा में ले जाना और उसे अस्थिर करना था।

जर्मनी के अनुसार यह साइबर हमला “Fancy Bear” नाम की रूस समर्थित हैकर ग्रुप द्वारा किया गया था, जिसे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय साइबर हमलों में जिम्मेदार बताया गया है। जर्मन खुफिया एजेंसियों का दावा है कि उनके पास ऐसे पक्के सबूत हैं जिससे पता चलता है कि रूस की मिलिट्री इंटेलिजेंस—GRU—ने इस हमले को अंजाम दिया। साथ ही जर्मनी ने यह भी आरोप लगाया है कि रूस ने स्टॉर्म 1516 नाम की एक बड़ी दुष्प्रचार (disinformation) मुहिम चलाकर जर्मनी के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की। इस अभियान में झूठी खबरें, फर्जी वीडियो और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाएँ फैलाकर राजनीतिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की गई। कहा जा रहा है कि इस अभियान में खास तौर पर ग्रीन पार्टी के नेता रॉबर्ट हेबेक और CDU के नेता फ्रेडरिक मर्ज़ (जो अब जर्मनी के चांसलर हैं) को निशाना बनाया गया।

गौर करने वाली बात यह है कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल संस्थान ने खुद भी इस बात की पुष्टि की है कि अगस्त 2024 में उसके ऑफिस कम्युनिकेशन सिस्टम को हैक किया गया था, हालांकि इस हमले से उड़ानों पर कोई असर नहीं पड़ा। फिर भी यह घटना जर्मनी के लिए गंभीर चेतावनी की तरह देखी जा रही है, क्योंकि एयर ट्रैफिक कंट्रोल किसी भी देश के लिए बेहद संवेदनशील क्षेत्र होता है।

दूसरी ओर, रूस ने इन सभी आरोपों को साफ-साफ नकार दिया है। बर्लिन में रूसी दूतावास ने कहा कि जर्मनी जो आरोप लगा रहा है वह “बेतुका, निराधार और पूरी तरह से गलत” है। रूस ने इस बात पर जोर दिया कि वह किसी भी विदेशी चुनाव में दखल नहीं देता और साइबर हमले जैसी गतिविधियों में उसकी कोई भूमिका नहीं है।

जर्मनी का कहना है कि वह इन हमलों और दुष्प्रचार अभियानों को हल्के में नहीं लेगा और अपने यूरोपीय साझेदार देशों के साथ मिलकर रूस के खिलाफ आवश्यक कदम उठाएगा। जर्मनी ने चेतावनी दी है कि रूस को उसकी “हाइब्रिड युद्ध रणनीतियों” (जैसे साइबर अटैक, फेक न्यूज, चुनावी दखल) के लिए कीमत चुकानी पड़ेगी। यूरोप में भी पिछले एक साल में UK और रोमानिया जैसे देशों ने रूस पर उनके आंतरिक मामलों में दखल देने के आरोप लगाए हैं, जिससे यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ गई है।

जर्मनी और रूस के रिश्तों में यह तनाव कोई नई बात नहीं है। रूस द्वारा 2022 में यूक्रेन पर हमला करने के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध तेजी से बिगड़े हैं। जर्मनी यूक्रेन का सबसे बड़ा समर्थक बनकर सामने आया है और मदद के रूप में सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक सहायता लगातार दे रहा है। इससे रूस नाखुश है और अक्सर जर्मनी को “शत्रुतापूर्ण देश” बताता रहता है। इसके अलावा, 2019 में बर्लिन के एक पार्क में हुए एक राजनीतिक हत्या मामले में भी दोनों देशों के बीच बड़ा तनाव पैदा हुआ था।

फिलहाल जर्मनी के नए आरोपों ने यूरोप में रूस की भूमिका को लेकर फिर से बहस तेज कर दी है। यूरोप के कई देश पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि रूस साइबर युद्ध को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, और यह पूरे महाद्वीप की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है। जर्मनी ने कहा है कि वह जल्द ही रूस के खिलाफ ठोस और कड़े कदम उठाने की घोषणा करेगा।

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