अंतरराष्ट्रीय डेस्क 12 दिसंबर 2025
यूरोप के बड़े देशों ने यह फैसला किया है कि रूस के जो फ्रीज अकाउंट्स यूरोप में पड़े हैं, उनका इस्तेमाल यूक्रेन की आर्थिक मदद के लिए किया जाएगा। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लगभग चार साल से चल रहे युद्ध ने यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को बेहद कमजोर कर दिया है। उसके पास सेना चलाने और सरकारी खर्चों को पूरा करने के लिए आवश्यक धन नहीं बचा है। आगामी दो वर्षों में यूक्रेन के बजट में लगभग 135 अरब यूरो की भारी कमी है। यूरोपीय देशों का मानना है कि रूस ने जो नुकसान किया है, उसकी भरपाई उसी के फ्रीज अकाउंट्स से होनी चाहिए।
इसी योजना के खिलाफ रूस बेहद भड़क गया है और उसने बेल्जियम की वित्तीय कंपनी यूरोक्लियर (Euroclear) के खिलाफ मॉस्को में मुकदमा दायर कर दिया है। रूस का आरोप है कि यूरोप उसके फ्रीज अकाउंट्स को “चुराने” की कोशिश कर रहा है और यह एक तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना है। गौरतलब है कि फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होते ही यूरोप ने रूस के लगभग 210 अरब यूरो को फ्रीज कर दिया था। इसमें से लगभग 185 अरब यूरो यूरोक्लियर में हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा है कि यह “पूरी तरह न्यायसंगत” है कि रूस के फ्रीज अकाउंट्स का उपयोग यूक्रेन को फिर से बनाने में किया जाए।
यूरोप चाहता है कि इन फ्रीज अकाउंट्स की मदद से यूक्रेन को लगभग 90 अरब यूरो की आर्थिक सहायता दी जा सके। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ का मानना है कि यह राशि यूक्रेन को भविष्य में रूस के हमलों से अपनी रक्षा करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। वहीं यूरोपीय आयोग का कहना है कि यूरोक्लियर जैसी वित्तीय संस्थाएँ पूरी तरह सुरक्षित हैं और रूस की कानूनी कार्रवाई का उन्हें यूरोप में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
हालांकि रूस के साथ-साथ बेल्जियम भी इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर चिंता जताता दिख रहा है। बेल्जियम का कहना है कि अगर किसी भी कारण से यह योजना उलटी पड़ी, तो उसका भारी वित्तीय बोझ बेल्जियम पर आ सकता है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट दे वेवर ने यूरोप से स्पष्ट और मजबूत गारंटी मांगी है। उनका कहना है कि बेल्जियम की अर्थव्यवस्था इतनी बड़ी नहीं कि वह अरबों यूरो का जोखिम उठा सके। यूरोक्लियर के खुद के भी लगभग 16–17 अरब यूरो रूस में फ्रीज हैं, जिनके नुकसान की भरपाई भी एक बड़ी समस्या बन सकती है।
यूरोप ने बेल्जियम की चिंता दूर करने के लिए अब एक नई रणनीति बनाई है। यूरोपीय संघ रूस के फ्रीज अकाउंट्स को अनिश्चितकाल तक फ्रीज करने की तैयारी कर रहा है। पहले हर छह महीने में इन अकाउंट्स पर रोक की अवधि बढ़ानी पड़ती थी, जिसमें हमेशा जोखिम रहता था। लेकिन नई व्यवस्था से यह रोक स्थायी हो सकती है। यूरोप का कहना है कि अगर रूस यूरोक्लियर या बेल्जियम के खिलाफ कोई फैसला लेता है, तो वह यूरोपीय देशों में मान्य नहीं होगा। इसके अलावा, यूरोक्लियर को रूस में अगर कोई नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई रूस के ही दूसरे फ्रीज अकाउंट्स से की जाएगी।
इस पूरे मामले में यूरोप पर समय का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। रूस की सीमा से लगे देशों—जैसे बाल्टिक देश, फिनलैंड और पोलैंड—का कहना है कि यूक्रेन की मदद में देरी की गुंजाइश नहीं है और रूस के फ्रीज अकाउंट्स का इस्तेमाल करना ही सबसे व्यावहारिक तरीका है। दूसरी ओर, अमेरिका भी अपने तरीके से रूस के फ्रीज अकाउंट्स का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है, जिसके चलते यूरोप अपने फ्रीज निर्णय पर तेजी से आगे बढ़ना चाहता है ताकि यह धन अमेरिका की किसी और योजना में न चला जाए।
यूरोपीय नेताओं का मानना है कि अगले सप्ताह होने वाली यूरोपीय शिखर बैठक (EU Summit) में महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे। यह फैसला सिर्फ यूक्रेन ही नहीं बल्कि यूरोप की सुरक्षा, रूस के खिलाफ वैश्विक मोर्चे और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था पर भी गहरा असर करेगा। वहीं रूस पहले ही चेतावनी दे चुका है कि उसके फ्रीज अकाउंट्स को छेड़ना “वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रतिक्रिया” को जन्म देगा।




