अंतरराष्ट्रीय डेस्क 12 दिसंबर 2025
मार्सेय की सड़कों पर खौफ—ड्रग गैंग्स की हिंसा बच्चों की जान लेने लगी
फ्रांस का दूसरा सबसे बड़ा शहर मार्सेय आज एक खौफनाक दौर से गुजर रहा है। शहर में फैले ड्रग गैंग्स की खूनी जंग अब इतनी भयानक हो चुकी है कि छोटे बच्चे तक इसका शिकार बन रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि स्थानीय लोग, वकील, पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ता एक ही शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं—“सायकोस”, यानी पूरे शहर पर छाई सामूहिक घबराहट और मानसिक दहशत। इसी माहौल में एक दिल दहला देने वाली घटना ने फ्रांस को हिला दिया—15 साल के आदेल का जला हुआ शव बच्चों को स्कूल जाते समय मिला। सिर में गोली मारकर उसे पेट्रोल से जला दिया गया था और उस दहशत की तस्वीर को गैंग के लोगों ने वीडियो में भी कैद किया। यह वही ‘सामान्य तरीका’ है जो अब मार्सेय की जमीन पर हिंसा का प्रतीक बन चुका है।
गैंग युद्ध का नया रूप—सोशल मीडिया, बच्चों की भर्ती और बेकाबू हिंसा
मार्सेय में ड्रग व्यापार तेजी से बदल रहा है। अब यह सिर्फ गिरोहों की लड़ाई नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए भर्तियां, धमकियां और हिंसा का प्रचार भी एक खूनी खेल बन गया है। पुलिस और मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पिछले आठ वर्षों में ड्रग नेटवर्क में किशोरों की संख्या चार गुना बढ़ चुकी है।
ड्रग गैंग्स ने बच्चों को ‘सस्ता श्रमिक’ बना दिया है—13–14 साल के बच्चे ‘लुकआउट’, यानी चौकीदार, बन जाते हैं, जबकि बड़े किशोर डीलिंग और हथियार चलाने तक में मजबूर किए जा रहे हैं। एक गैंग सदस्य “द इम्मॉर्टल” ने बताया कि अब किसी नियम-कायदे की कोई अहमियत नहीं है—“पहले कुछ कोड थे। लेकिन अब कोई नियम नहीं। लोग बिना वजह मार दिए जाते हैं। शहर अराजकता में डूब चुका है।”
कानून पर भारी गैंग—वकील तक डर के साये में
मार्सेय के कई मोहल्ले ऐसे हैं जहां लोग कहते हैं कि गैंग कानून से ऊपर हो चुके हैं। एक स्थानीय वकील ने कहा कि वह अब ड्रग हिंसा से जुड़े पीड़ितों के केस लेने से डरती हैं, क्योंकि गिरोह उनके परिवार को नुकसान पहुंचा सकता है।
उन्होंने कहा, “शहर में डर का ऐसा माहौल है कि लोग खुद को कानून के हवाले नहीं, बल्कि गैंग के दया-मरहम पर छोड़ चुके हैं।”
मासूमों की जान पर खेल—गैंग का संदेश देने के लिए निर्दोषों की हत्या
मार्सेय की मौजूदा दहशत एक 20 वर्षीय ट्रेनी पुलिसकर्मी महदी केसासी की हत्या के बाद और गहरी हो गई। वह ड्रग व्यापार से कोई संबंध नहीं रखते थे। माना जाता है कि उनकी हत्या उनके बड़े भाई अमीन केसासी के खिलाफ चेतावनी थी, जो स्थानीय तौर पर एक मशहूर एंटी-ड्रग कार्यकर्ता हैं। अमीन ने विदेशी न्यूज संस्थानों से कहा, “मैंने हमेशा सोचा था कि मेरे परिवार की ज़िंदगी धागे से लटकी है। लेकिन कोविड के बाद हालात और बदतर हो गए। अपराधी कम उम्र के और ज्यादा जालिम हो गए हैं।”
गैंग का ‘फ्रैंचाइज़ मॉडल’—20,000 लोग शामिल, अरबों का ड्रग नेटवर्क
मार्सेय के ड्रग व्यापार पर एक बड़े गैंग DZ माफिया का नियंत्रण है, जो फ्रैंचाइज़ मॉडल पर काम करता है। छोटे-छोटे नेटवर्क को इलाके बांट दिए जाते हैं, जहां किशोर, शरणार्थी और बिना दस्तावेज वाले युवा हिंसक संघर्षों में धकेले जाते हैं। पुलिस का अनुमान है कि शहर के ड्रग उद्योग में लगभग 20,000 लोग शामिल हैं, और साल 2024 में 42 मिलियन यूरो की आपराधिक संपत्ति जब्त की गई। सोशल मीडिया पर खुलेआम ड्रग विज्ञापन चलते हैं—हर नशे का अपना इमोजी और रात 10 बजे से आधी रात तक “होम डिलीवरी” के वादे। दूसरी ओर भर्ती के लिए पोस्ट भी आते हैं—“250 यूरो में लुकआउट चाहिए”, “500 यूरो में ड्रग कैरियर”।
पुलिस की ‘सिक्योरिटी बॉम्बार्डमेंट’ रणनीति—लेकिन नतीजे सीमित
हिंसा को रोकने के लिए पुलिस अब ‘बॉम्बार्डमेंट मिशन’ चला रही है—एक ही बार में कई टीमों का अचानक किसी ड्रग हॉटस्पॉट पर धावा बोलना। BBC ने ऐसे एक अभियान में पुलिस को देखा, जहां वे एक बूढ़ी इमारत में घुसकर कोकीन के पैकेटों और खाली वायल्स से भरी एक गंदी तहखाने तक पहुँचे।
कई बार युवा खुद गिरफ्तार होना चाहते हैं, क्योंकि वे गैंग के चंगुल में फंसे होते हैं और मजबूरी में काम कर रहे होते हैं। शहर के मुख्य अभियोजक निकोलस बेसोन ने चेतावनी दी—“सोशल मीडिया पर भर्ती बढ़ रही है। बच्चे फँसा लिए जाते हैं। काल्पनिक कर्ज बनाकर उन्हें गुलाम बना दिया जाता है। यह अल्ट्रा-हिंसा है।”
राजनीति में भी उबाल—अत्यधिक पुलिसिंग या गरीबी पर हमला?
फ्रांस की राजनीति इस हिंसा पर बंटी हुई है। दक्षिणपंथी नेता ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ और कड़े प्रवासन नियमों की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि ड्रग नेटवर्क में काम करने वाले अधिकतर लोग प्रवासी या विदेशी पृष्ठभूमि वाले हैं।
दूसरी ओर, कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ अपराध की नहीं, बल्कि दशकों से उपेक्षित गरीबी, असमानता और भ्रष्टाचार की है। मार्सेय के प्रसिद्ध लेखक और ड्रग विशेषज्ञ फिलिप प्युजोल कहते हैं, “ये बच्चे हिंसा करते हैं, लेकिन दिल से वे अब भी बच्चे हैं। सपनों वाले बच्चे। समाज ने उन्हें इस राक्षस के हवाले किया है।”
मार्सेय पर मंडराता डर—और एक सवाल: क्या इस हिंसा को रोका जा सकता है?
शहर में माहौल इतना तनावपूर्ण है कि लोग हर आवाज़, हर गोली, हर खबर से सहम जाते हैं। बच्चे तक मौत देख रहे हैं। परिवार अपने बेटों को स्कूल भेजने में डरते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि अगर गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सामाजिक टूटन को ठीक न किया गया तो यह हिंसा और बढ़ेगी।
मार्सेय आज सिर्फ एक शहर नहीं—एक चेतावनी है कि जब अपराध, गरीबी, सोशल मीडिया, राजनीति और असमानता एक साथ फटते हैं, तो उनका शिकार सबसे पहले बच्चे बनते हैं।



