अंतरराष्ट्रीय डेस्क 11 दिसंबर 2025
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदार डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया भाषण में फिर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने अपने नए “गोल्ड कार्ड” इमिग्रेशन सिस्टम को प्रमोट करते हुए भारत और चीन के छात्रों का उदाहरण दिया और कहा कि दुनिया के सबसे होनहार और प्रतिभाशाली छात्र अमेरिकी यूनिवर्सिटी से पढ़कर जब अपने देश लौट जाते हैं, तो यह “शर्म की बात (a shame)” है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है कि क्या ट्रंप वास्तव में भारतीय प्रतिभाओं की तारीफ कर रहे थे या यह उनके विवादित इमिग्रेशन मॉडल को मजबूत करने का तरीका था।
ट्रंप ने कहा कि “भारत और चीन जैसे देशों के शानदार दिमाग हमारे विश्वविद्यालयों से टॉप डिग्री लेकर जाते हैं लेकिन उन्हें यहां रहने की इजाजत नहीं मिलती। यह शर्म की बात है। यह बेवकूफी है।” ट्रंप का तर्क था कि अमेरिका ऐसे हुनरमंद युवाओं को खो देता है जो भविष्य में तकनीक, विज्ञान, व्यापार और नवाचार के क्षेत्र में अमेरिका को आगे ले जा सकते थे। उनके अनुसार, पुराने इमिग्रेशन नियम इतने कठोर थे कि एक विदेशी छात्र को पढ़ाई पूरी होते ही अमेरिका छोड़ना पड़ता था—चाहे वह कितना भी टैलेंटेड क्यों न हो।
इसी तर्क के आधार पर ट्रंप ने “गोल्ड कार्ड प्रोग्राम” पेश किया है, जो एक तरह से पैसे देकर स्थायी निवास पाने की स्कीम है। इसके तहत विदेशी नागरिक, खासकर उच्च कौशल वाले छात्र, शोधकर्ता, स्टार्ट-अप फाउंडर, निवेशक और हाई टैलेंट प्रोफेशनल, एक बड़ी रकम अमेरिकी खजाने में जमा करके अमेरिका में लंबे समय तक रह सकते हैं। ट्रंप का दावा है कि इस कार्ड से अमेरिका को दुनिया के श्रेष्ठ दिमाग मिलेंगे और कंपनियों को भी ऐसे विशेषज्ञों को रखने में मदद मिलेगी जिन्हें वे वीज़ा नियमों के कारण खो देते थे।
लेकिन उनका यह बयान विवाद का कारण भी बना। आलोचकों का मानना है कि ट्रंप ने भारतीयों की प्रतिभा का उदाहरण देकर इसे “शर्म” से जोड़ने की कोशिश इसलिए की ताकि उनके महंगे गोल्ड कार्ड प्रोग्राम को सही ठहराया जा सके। बहुत से विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना केवल अमीर विदेशी नागरिकों का रास्ता आसान करती है, जबकि लाखों मध्यवर्गीय भारतीय छात्र—जो अमेरिका में पढ़ने और काम करने का सपना देखते हैं—उनके लिए यह दरवाज़ा पहले से अधिक कठिन हो जाएगा।
इसके बावजूद, कुछ लोग इसे एक सकारात्मक संकेत भी मानते हैं। उनका कहना है कि ट्रंप ने पहली बार स्पष्ट रूप से माना कि भारतीय छात्र और प्रोफेशनल अमेरिका के लिए ‘गिफ्ट’ हैं और अमेरिका उन्हें खोकर नुकसान उठाता है। यही कारण है कि वे उन्हें रोकने के लिए नए रास्ते बना रहे हैं। हालांकि, यह रास्ता कितना न्यायशील है—इस पर सवाल जस का तस बना हुआ है।
ट्रंप के बयान का अर्थ साफ है—अमेरिका भारत की प्रतिभा को गंभीरता से लेता है, लेकिन वह इन प्रतिभाओं को अपने देश में रोकने के लिए ऐसे मॉडल बना रहा है जो सबके लिए बराबर नहीं हैं। गोल्ड कार्ड योजना से कुछ भारतीयों को फायदा मिल सकता है, लेकिन बड़ी आबादी के लिए यह एक ऐसा सिस्टम बन सकता है जिसमें “अमेरिका का सपना” अब केवल पैसे वालों के लिए रह जाएगा।




