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15वाँ नेशनल स्ट्रीट फूड फेस्टिवल 2025: ज़ायका इंडिया का

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महेंद्र सिंह। नई दिल्ली 9 दिसंबर 2025

दिल्ली में इस वर्ष आयोजित 15वाँ नेशनल स्ट्रीट फूड फेस्टिवल 2025 सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि ‘भारत की खाद्य विरासत’ का एक ऐसा महाकुंभ बन गया है, जहाँ देश के अलग–अलग राज्यों के अनगिनत स्वाद, खुशबू और परंपराएँ एक साथ जमा हो रही हैं। यहाँ कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो पूरा भारत एक ही जगह जीवित हो उठा हो—कहीं तवा गर्म है, कहीं रसोइयों की पुकार है, कहीं घी की महक हवा में घुली है, और कहीं मसालों की झनकार दिल तक उतर जाती है। यह फेस्टिवल बताता है कि भारत सिर्फ एक भूगोल नहीं, बल्कि स्वादों का एक अनंत ब्रह्मांड है।

उड़ीसा के स्टॉल पर पहुँचते ही रागी चाकुली, छेना पोड़ा और दही वड़ा–आलू दम की खुशबू स्वागत करती है। चिकन और फिश पत्तापुड़ा लकड़ी के पत्तों में लिपटकर स्टीम में पकते हैं, और रागी के व्यंजन वहाँ की पौष्टिक और पारंपरिक खान–पान संस्कृति की पहचान बनकर सामने आते हैं। इसके ठीक बाद राजस्थान का हिस्सा मानो रेगिस्तान के दिल से उठकर फेस्टिवल में उतर आया हो—मूली का हलवा, लहसन की खीर और बाजरे का खिचड़ा अपने देहाती स्वाद से हर किसी को खींच लेते हैं। दाल–प्याज–मावा कचौरी और दाल बाटी चूरमा राजस्थान की समृद्ध खाद्य परंपरा का शानदार परिचय देती हैं।

गुजरात के लोचा, दाबेली और चिकन खव्सा में एक अलग ही फ्यूज़न दुनिया है—जहाँ पारंपरिक स्वादों के साथ नए प्रयोगों का तड़का भी है। उत्तराखंड के साधे–सादे लेकिन बेहद स्वादिष्ट व्यंजन—आलू गुटके, झंगोरा की खीर और उत्तराखंडी थाली—पहाड़ी जीवन की सरलता और सादगी का एहसास कराते हैं। वहीं बिहार के स्टॉल पर भीड़ सबसे ज़्यादा है—ग्रीन लिट्टी, मटन लिट्टी, तवा लिट्टी चिकन, ताश कबाब और चम्पारण मीट की सुगंध दूर से ही लोगों को खींच लाती है। बिहारी नाश्ते की चूरा–घुघुनी और कटिहार का भक्का लोगों को बचपन की यादों तक ले जाते हैं।

उत्तर प्रदेश का स्टॉल इस फेस्टिवल की जान है। अयोध्या की कुल्हड़ कचौरी से लेकर बनारस की टमाटर चाट, लखनऊ का मलइयो, केसरिया दूध, गलावटी और शामी कबाब—हर डिश अपने शहर की पहचान लेकर खड़ी है। चिकन निहारी और कोरमा की खुशबू दूर तक फैलकर लोगों को कतार में खड़ा होने पर मजबूर कर रही है। हिमाचल के सिड्डू—रागी, मल्टीग्रेन और चिकन—धीमी आँच पर पकते हैं, तो चा–चा सिड्डू वहाँ की पहाड़ी संस्कृति का अनोखा स्वाद पेश करता है।

चंडीगढ़ और पंजाब के स्टॉल पर पनीर की दुनिया बस गई है—मलाई चाप, पनीर साठे, पनीर टिक्का और दाल मखनी लोगों को बार–बार चखने पर मजबूर करती है। दिल्ली का स्टॉल हमेशा की तरह भीड़ से भरा है—छोले कुलचे, टोकरी चाट, राम लड्डू, भल्ले पापड़ी और काठी रोल बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सबके फ़ेवरिट बने हुए हैं। चिकन कबाब और मुग़लेट को लोग रिकॉर्ड संख्या में खरीद रहे हैं।

जम्मू–कश्मीर का स्टॉल किसी खूबसूरत काव्य जैसा है—कश्मीरी दम आलू, दम पुलाव, काहवा, नून चाय, नदरू और आलू मुंजे, गोश्ताबा और रिश्ता कश्मीरी भोजन की राजसी विरासत दुनिया के सामने रख देते हैं। मध्य प्रदेश की इंदौरी पोहा और दाल पकवान हमेशा की तरह ट्रेंड में हैं, जबकि वेस्ट बंगाल के पुचका, झालमुरी, रोसोगुला और मछली के व्यंजनों ने हर किसी को मुग्ध किया हुआ है। फिश फ्राई, कटलेट और तंदूरी पकौड़ा बंगालियों के समुद्री लगाव की शानदार मिसाल हैं।

उत्तर–पूर्वी भारत की मौजूदगी इस फेस्टिवल को और भी विशेष बनाती है। असम का बांबू चिकन, बांबू फिश, स्टीकी राइस और तिल चिकन—बांस की खुशबू और मसालों की धुन का दुर्लभ मेल है। मेघालय का जदोह और सिक्किम–नागालैंड के मोमो, ताइपो और केक्स लोगों को एक अलग पाक दुनिया से मिलवाते हैं। मणिपुर का बर्मीज़ मोहिंगा और सिंगजू पूर्वोत्तर की अनोखी खाद्य पहचान को प्रकट करते हैं।

महाराष्ट्र के स्टॉल पर मुंबई का वड़ा पाव, रगड़ा पेटीस, मिसल पाव और मालवणी चिकन रस्सा भीड़ को हिन्दुस्तानी स्ट्रीट फूड की सबसे तेज–तर्रार ऊर्जा में डुबो देते हैं। पूरन पोली, झुंका, ज्वार भाकरी से लेकर नागपुर की खावा–पूरी हर व्यंजन लोगों की थाली में अपनी जगह बना रहा है। दक्षिण भारत की सुगंध आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल से आती है—बांबू बिरयानी, हैदराबादी चाट, पत्थर का गोश्त, रागी इडली, नीर डोसा, पुट्टू चना करी और मालाबारी परोटा लोगों को एक सुदूर दक्षिणी यात्रा पर ले जाते हैं।

और अंत में, गोवा। समुद्र की नम हवा जैसे इन व्यंजनों में उतर आई हो—रस ऑमलेट, चिकन ज़कुटी, काफ्रेल और पुर्तगीज़ ड्राई फिश फ्राई लोगों को मिनी–गोवा का एहसास कराते हैं।

यह फेस्टिवल सिर्फ खाने का उत्सव नहीं, बल्कि भारत की विविधता, परंपराओं और एकता का ऐसा मंत्रमुग्ध कर देने वाला अनुभव है जहाँ हर स्टॉल, हर डिश और हर खुशबू कहती है—यही है भारत का असली स्वाद, यही है भारत का दिल।

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