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पुतिन: भारत–रूस दोस्ती की नींव गांधी के न्याय और अहिंसा के सिद्धांत

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आलोक कुमार । नई दिल्ली 5 दिसंबर 2025

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने अपने भारत दौरे के दौरान महात्मा गांधी स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और आगंतुक रजिस्टर में एक अत्यंत भावुक संदेश लिखा, जिसने भारतीय राजनीतिक और वैचारिक विमर्श को नई दिशा दे दी है। पुतिन ने लिखा कि भारत और रूस की दोस्ती की नींव महात्मा गांधी के उन सिद्धांतों पर आधारित है जिनका सार है—न्याय, अहिंसा, स्वतंत्रता और परस्पर सहयोग। उनके इस बयान ने यह स्पष्ट किया कि वैश्विक मंच पर गांधी का प्रभाव, उनकी विचारधारा और उनकी मूल मान्यताएँ आज भी विश्व राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को गढ़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

पुतिन ने अपने संदेश में यह स्वीकार किया कि महात्मा गांधी केवल भारत के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के ऐसे मार्गदर्शक हैं जिनके विचार समय, सीमाओं और राजनीतिक विचारधाराओं से परे जाकर विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। उन्होंने गांधी को उस आधुनिक विश्व व्यवस्था का अग्रदूत बताया जो शांति, समानता और परस्पर सम्मान पर आधारित है। पुतिन ने लिखा कि गांधी के सपनों में वह विश्व था जिसमें कोई राष्ट्र दूसरे की सत्ता या वर्चस्व का गुलाम न हो, बल्कि सभी देश बराबरी, कूटनीतिक सम्मान और परस्पर सहयोग के आधार पर आगे बढ़ें। यह वही सिद्धांत हैं जिनके आधार पर रूस और भारत दशकों से एक मजबूत और स्थिर संबंध बनाए हुए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि जब दुनिया भर के नेता गांधी को अपना प्रेरणास्रोत मानते हुए उनके विचारों को आधुनिक विश्व के लिए मार्गदर्शक बताते हैं, तब अपने देश के भीतर कुछ मुट्ठीभर लोग गांधी के विचारों का अपमान करने में लगे रहते हैं। यह विडंबना सिर्फ विचारों की नहीं, बल्कि इतिहास बोध की भी है—क्योंकि यह वही लोग हैं जिनकी गांधी पर समझ शून्य है। न उनका गांधी के संघर्ष को लेकर कोई अध्ययन है, न उनके दर्शन की कोई अनुभूति। वे सिर्फ राजनीतिक पूर्वाग्रहों और वैचारिक अंधताओं के चलते गांधी का विरोध करते हैं, जबकि विश्व के अग्रणी नेता, नीति निर्माता और दार्शनिक खुले तौर पर गांधी को मानवता का महानतम शिक्षक मानते हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि पुतिन, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और रणनीतिक नेताओं में गिने जाते हैं, गांधी की विचारधारा को आधुनिक कूटनीति का आधार बताते हैं। जब कोई राष्ट्राध्यक्ष यह स्वीकार करता है कि दो देशों के दशकों पुराने रिश्ते किसी राजनीतिक सौदे या अस्थायी रणनीति पर नहीं, बल्कि एक महान विचारक के सिद्धांतों पर टिके हैं, तो यह गांधी के प्रभाव की गहराई और स्थायित्व का प्रमाण है। यह संदेश वर्तमान भारत के लिए भी एक दर्पण की तरह है—जो हमें याद दिलाता है कि दुनिया गांधी को किस ऊँचाई पर रखती है और हम स्वयं अपने महानायक के प्रति कितने उदासीन हो चले हैं।

पुतिन की यह टिप्पणी केवल भारत–रूस संबंधों का दस्तावेज़ भर नहीं है—यह उन सभी लोगों के लिए एक परोक्ष चेतावनी भी है जो गांधी के योगदान को कमजोर, अप्रासंगिक या गलत तरीके से पेश करने की कोशिश करते हैं। यह संदेश बताता है कि विश्व गांधी के सिद्धांतों को 21वीं सदी की राजनीति, संघर्ष समाधान, सामाजिक न्याय और वैश्विक शांति का आधार मानता है, जबकि हमारे भीतर के कुछ समूह जानबूझकर इन सिद्धांतों को नकारने या विकृत करने की कोशिश कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, पुतिन द्वारा लिखा गया यह संदेश सिर्फ एक हस्ताक्षरित टिप्पणी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में गांधी के बढ़ते पुनरुत्थान का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि जब दुनिया भारत के महानायक को शांति और समानता की राह का निर्माता मान रही है, तब भारत के अंदर हमें भी गांधी को पुनः पढ़ना, समझना और उनके सिद्धांतों से सीखना होगा—क्योंकि गांधी भारत की आत्मा हैं, और आत्मा को जितना भी दबाया जाए, वह उतनी ही शक्तिशाली होकर उभरती है।

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