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जासूसी सॉफ्टवेयर : Pegasus बनाम Sanchar Saathi —- नागरिकों की निजता फिर खतरे में?

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अवधेश कुमार । नई दिल्ली 3 दिसंबर 2025

दुनियाभर में खुफिया जासूसी और नागरिकों की निजी जानकारी की निगरानी को लेकर जिस पेगासस (Pegasus) स्पाईवेयर ने कभी भारी तूफ़ान मचाया था, अब उसी की तुलना भारत सरकार के Sanchar Saathi ऐप से होने लगी है। Pegasus की यादें अभी भी दुनिया के बड़े देशों में राजनीतिक, कानूनी और मानवाधिकार विवादों में ताज़ा हैं—और अब जब विपक्ष और नागरिक अधिकार समूह Sanchar Saathi को उसी चश्मे से देख रहे हैं, तो बहस और गर्म हो गई है। सवाल यह है कि क्या दोनों में कोई समानता है भी, या यह तुलना केवल राजनीतिक आरोपों का परिणाम है?

Pegasus, इज़राइल की कंपनी NSO Group द्वारा बनाया गया एक हाई-टेक जासूसी सॉफ्टवेयर था, जिसे केवल सरकारों को बेचने का दावा किया गया था। इसकी खूबी यह थी कि यह बिना क्लिक के फोन में घुस सकता था, व्हाट्सऐप चैट, कॉल लॉग, कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन — सबकुछ एक्सेस कर सकता था। 50,000 से ज्यादा संभावित टारगेट्स की सूची सामने आने के बाद दुनिया भर में हाहाकार मच गया। कई देशों की संसदों में बहस हुई, भारत में भी विपक्ष ने सरकार पर पत्रकारों, एक्टिविस्टों और नेताओं की जासूसी करने के आरोप लगाए। माना तो यह भी जाता है कि पेगासस के जरिए सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की भी जासूसी कराई गई और फिर उन पर दबाव डलवा कर राम मंदिर और कुछ अन्य महत्वपूर्ण मामलों में अपने पक्ष में फैसला कराया गया। पेगासस की इसी डरावनी क्षमता ने इसे आधुनिक इतिहास का सबसे खतरनाक स्पाईवेयर बना दिया।

अब इसी पृष्ठभूमि के बीच भारत सरकार के Sanchar Saathi ऐप पर सवाल उठने लगे हैं। संचार मंत्रालय का कहना है कि यह एक नागरिक-सुरक्षा ऐप है, जिसके जरिए लोग अपने खोए हुए मोबाइल बंद करा सकते हैं, IMEI ट्रैक कर सकते हैं, और फर्जी मोबाइलों पर रोक लगा सकते हैं। लेकिन आलोचकों का आरोप है कि ऐप में ऐसे मॉड्यूल शामिल हैं जो मोबाइल डेटा और नागरिकों की गतिविधियों पर “अत्यधिक निगरानी” की संभावना पैदा करते हैं। हालांकि सरकार साफ कह रही है कि Sanchar Saathi केवल टेलीकॉम सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी रोकने का माध्यम है—न कि किसी प्रकार का निगरानी उपकरण।

इसके बावजूद, Pegasus की कुख्यात छवि ने किसी भी टेलीकॉम-केंद्रित निगरानी प्रणाली के प्रति जनता में एक स्वाभाविक संदेह पैदा कर दिया है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि Pegasus और Sanchar Saathi की तकनीकी संरचना और उद्देश्य पूरी तरह अलग हैं—Pegasus गुप्त जासूसी के लिए बनाया गया सॉफ्टवेयर था, जबकि Sanchar Saathi एक सरकारी उपभोक्ता सेवा प्लेटफ़ॉर्म है। लेकिन समस्या यह है कि निगरानी और डेटा प्राइवेसी का मुद्दा आज इतना संवेदनशील हो चुका है कि सरकार द्वारा चलाया गया कोई भी डिजिटल ट्रैकिंग मैकेनिज़्म तुरंत “जासूसी” की बहस में घिर जाता है।

विपक्ष इस तुलना को तेज़ी से उछाल रहा है, आरोप लगाते हुए कि सरकार किसी भी माध्यम से नागरिकों के मोबाइल डेटा तक पहुंच बनाना चाहती है—चाहे वह धोखाधड़ी रोकने के नाम पर ही क्यों न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को डेटा प्रोटेक्शन कानून को और कठोर बनाना होगा, ताकि कोई भी सरकारी ऐप—चाहे उसका उद्देश्य कितना भी कल्याणकारी क्यों न हो—निजता पर अतिक्रमण न कर सके। Pegasus विवाद ने दुनिया को यह सिखाया कि तकनीक जितनी शक्ति देती है, उतना ही बड़ा खतरा भी पैदा करती है।

Sanchar Saathi की तुलना Pegasus से भले ही तकनीकी रूप से गलत हो, लेकिन यह बहस एक महत्वपूर्ण संदेश दे रही है—निजता (privacy) जनता का पहला अधिकार है, और किसी भी तकनीक में पारदर्शिता व जवाबदेही अनिवार्य है। Pegasus से सीख लेकर भारत को डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में ऐसे कदम उठाने होंगे जो सुरक्षा भी दें और भरोसा भी बनाए रखें।

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