Home » Environment » दिल्ली की हवा ज़हर, कूड़ा पहाड़ और ट्रैफिक जाम— राजधानी ‘स्लो पॉइज़न’ में तब्दील: संदीप दीक्षित

दिल्ली की हवा ज़हर, कूड़ा पहाड़ और ट्रैफिक जाम— राजधानी ‘स्लो पॉइज़न’ में तब्दील: संदीप दीक्षित

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

महेंद्र सिंह। 29 नवंबर 2025

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने दिल्ली की बिगड़ती हवा और कचरा प्रबंधन की लापरवाही पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि राजधानी आज कूड़े के पहाड़ों, दमघोंटू धुएँ और अव्यवस्थित शहरी प्रबंधन के कारण ‘स्लो पॉइज़न’ में बदल चुकी है। दिल्ली के कई इलाकों में कूड़े को खुलेआम जलाया जा रहा है, जो वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि एक समय शहर में बड़ी संख्या में डस्टबिन लगाए गए थे जहां लोग कचरा अलग-अलग श्रेणियों में डालते थे, लेकिन अब वो व्यवस्था ही खत्म कर दी गई है। ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्लांट जैसी आधुनिक तकनीक, जो दिल्ली को कचरे के संकट से निकाल सकती थी, उसे कैंसर फैलने जैसे अफवाहों के आधार पर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। दीक्षित के मुताबिक सरकार को प्रदूषण पर गंभीरता से काम करना होगा और जनता के साथ बैठकर समाधान ढूँढना होगा।

संदीप दीक्षित ने कहा कि जब दिल्ली में विकास की रफ्तार सही दिशा में थी, तब राजधानी में औसत ट्रैफिक स्पीड 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा हुआ करती थी। लेकिन आज की सरकारों की नाकामी ने राजधानी को जाम के दलदल में धकेल दिया है। टूटे-फूटे और अव्यवस्थित रोड-इंफ्रास्ट्रक्चर ने वाहनों के प्रदूषण स्तर को ढाई गुना बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम लगभग ध्वस्त हो चुका है—बसों में यात्रा करने वालों की संख्या लगातार घट रही है जबकि प्राइवेट वाहनों की संख्या भयावह तरीके से बढ़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली में मेट्रो के नए रूट आखिर क्यों नहीं बन रहे? यह करोड़ों यात्रियों की जीवनरेखा है और सरकार का इस पर कोई ध्यान नहीं दिखता।

दीक्षित ने आगे कहा कि प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन से आता है, लेकिन इस पर कोई बात नहीं करता। दिल्ली की अवैध फैक्ट्रियां गंदा फ्यूल जलाकर जहरीला धुआं हवा में छोड़ रही हैं, और यह बिना MCD, पुलिस और नेताओं की मिलीभगत के संभव ही नहीं। उन्होंने 2004-05 का उदाहरण दिया जब तत्कालीन सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाली कई फैक्ट्रियों को हटाया था, लेकिन आज की सरकारें वैसा कोई कदम उठाने को तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार, सियासत और सुविधा के नाम पर दिल्ली के लोगों के फेफड़ों की कीमत वसूली जा रही है।

कांग्रेस नेता के अनुसार, प्रदूषण के लिए पराली और पटाखों को जिम्मेदार ठहराना मात्र एक राजनीतिक बहाना है। उन्होंने कहा कि असल और सबसे बड़ा कारण—करीब 35%—वाहनों से होने वाला धुआं है, जो पूरे साल हवा को जहरीला करता रहता है। BJP और AAP की लड़ाई में दिल्ली का आम आदमी कुचला जा रहा है। आरोप-प्रत्यारोप के इस खेल में हवा साफ नहीं हुई—बल्कि हालात और खतरनाक हो गए। दीक्षित का स्पष्ट कहना है कि अगर सरकारें प्रदूषण को नियंत्रित नहीं कर पा रही हैं, तो उन्हें खुद को ‘सरकार’ कहने का भी अधिकार नहीं है।

दिल्ली की हवा अब केवल प्रदूषित नहीं, बल्कि जानलेवा हो चुकी है। दीक्षित ने चेतावनी देते हुए कहा कि डॉक्टरों के मुताबिक दिल्ली की खराब हवा एक आम आदमी की उम्र 6 से 7 साल तक कम कर रही है। बीमार लोगों के लिए खतरा और अधिक है। इसे उन्होंने “स्लो पॉइज़न” बताया—जहां हर सांस के साथ शरीर में ज़हर उतर रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि दिल्ली के नागरिक सरकारों से जवाब मांगें, सवाल उठाएँ और उन्हें जिम्मेदार बनाएं। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो दिल्ली रहने लायक शहर नहीं बचेगी—बल्कि एक गैस चेंबर में बदल जाएगी।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments