सुमन कुमार | नई दिल्ली 26 नवंबर 2025
नई दिल्ली, 23 नवंबर 2025: देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों एक बार फिर जहरीली हवा की मार झेल रही है। सर्दी शुरू होते ही शहर का आसमान धुएं और धुंध की मोटी परत में घिर गया है। लोग सुबह घरों से निकलते हैं तो सड़कें कोहरे में नहीं, बल्कि प्रदूषण की धूल और धुएं से ढकी मिलती हैं। हवा में इतनी गंदगी है कि सांस लेते ही गले में जलन होने लगती है। डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली की हवा इस समय बेहद खतरनाक स्तर पर है, और इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, जवानों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति छोटे बच्चों की है। अस्पतालों में खांसी, सांस फूलना, बुखार, निमोनिया और अस्थमा जैसी शिकायतों वाले बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। कई डॉक्टरों का कहना है कि कुछ हफ्तों के भीतर पूरी तरह स्वस्थ बच्चे भी निमोनिया का शिकार हो रहे हैं। कुछ बच्चों में जन्म से ही सांस की बीमारियों के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, जो प्रदूषण की गंभीरता को दिखाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों को मास्क पहनकर भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है, और कई स्कूलों ने क्लासें ऑनलाइन करने पर विचार शुरू कर दिया है।
जवान और कामकाजी लोग भी इस हवा का असर महसूस कर रहे हैं। ऑफिस जाने वालों को सुबह से ही सिरदर्द, आंखों में जलन, थकान और सांस फूलने जैसी परेशानी हो रही है। जिम या सुबह की सैर करने वाले लोग अब बाहर एक्सरसाइज करने से डर रहे हैं, क्योंकि डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषित हवा में दौड़ना या कसरत करना फेफड़ों को और ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इससे दिल की बीमारी और फेफड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
सबसे ज्यादा मुश्किल बुजुर्गों को हो रही है। जिन लोगों को पहले से ही दिल, दमा या सांस की समस्या है, उनकी हालत और बिगड़ रही है। कई बुजुर्गों को घर से बाहर निकलने में डर लग रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषण के कारण दिल का दौरा पड़ने और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। अस्पतालों में सांस लेने में दिक्कत और सीने में दर्द वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं जैसे निर्माण कार्य रोकना, स्कूल बंद करना, ट्रकों की आवाजाही सीमित करना और पानी का छिड़काव करना, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये सिर्फ अस्थायी उपाय हैं। असली समाधान तभी होगा जब वाहनों का धुआं कम हो, उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषण रोका जाए और पराली जलाने पर सख्त नियंत्रण हो।
दिल्ली की हवा अब सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं रह गई है, यह लोगों के स्वास्थ्य का बड़ा खतरा बन गई है। बच्चों का बचपन, जवानों की ऊर्जा और बुजुर्गों की जीवन-आशा इस जहरीली हवा में धीरे-धीरे खत्म हो रही है। अगर जल्द और मजबूत कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में दिल्ली में सांस लेना और मुश्किल हो जाएगा।




