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इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2024: सोनिया गांधी ने मिशेल बैचेलेट को इंदिरा की विरासत का सशक्त प्रतीक बताया

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नई दिल्ली 19 नवंबर 2025 | रिपोर्ट: ओम प्रकाश को 

दिल्ली में आयोजित इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2024 के भव्य समारोह में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बैचेलेट के जीवन, संघर्ष और अविश्वसनीय उपलब्धियों पर एक भावपूर्ण और प्रेरणादायी भाषण दिया। सोनिया गांधी ने कहा कि आज उन्हें यह बताते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि जिस असाधारण महिला नेता को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया जा रहा है—उनका जीवन भी ठीक उसी तरह साहस, अन्याय के खिलाफ संघर्ष और मानवता के प्रति समर्पण से भरा है जैसा इंदिरा गांधी का था। उन्होंने कहा कि यह संयोग नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक समानता है कि दोनों महिलाएँ—इंदिरा गांधी और मिशेल बैचेलेट—ऐसे समय में पैदा हुईं जब उनके देश उथल-पुथल, संघर्ष और उत्पीड़न से गुजर रहे थे। दोनों नेताओं ने अपने-अपने जीवन में दमन, क्षति, अत्याचार और असुरक्षा का सामना किया, लेकिन वे टूटीं नहीं—बल्कि और मज़बूत होकर उभरीं।

सोनिया गांधी ने बताया कि बैचेलेट मात्र एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि एक ऐसी स्त्री हैं जिनका जीवन संघर्ष और पुनर्निर्माण की प्रेरक कहानी है। अपने शुरुआती जीवन में उन्होंने जेल, यातना, परिवार के सदस्यों की मृत्यु और निर्वासन का कड़वा अनुभव झेला। लेकिन वे अपनी मातृभूमि लौटने में सफल रहीं और चिली के लोकतांत्रिक पुनर्जागरण की प्रत्यक्ष साक्षी बनीं। एक प्रशिक्षित डॉक्टर के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय में काम किया और फिर 2000 में स्वास्थ्य मंत्री बनीं। इसके बाद उन्होंने इतिहास रचते हुए न केवल चिली बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका की पहली महिला रक्षा मंत्री बनने का गौरव हासिल किया। आगे चलकर वह दो बार चिली की राष्ट्रपति चुनी गईं—एक उपलब्धि जो पुरुष-प्रधान राजनीति में उनके अपार साहस और नेतृत्व को दर्शाती है।

अपने कार्यकाल में बैचेलेट ने सामाजिक न्याय और मानव अधिकारों को अपने शासन का मूल आधार बनाया। सोनिया गांधी ने उल्लेख किया कि राष्ट्रपति के रूप में बैचेलेट ने चिली के स्वास्थ्य ढांचे में ऐतिहासिक सुधार किए। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया, कमजोर और असुरक्षित वर्गों तक सरकारी सेवाओं की पहुँच बढ़ाई, महिलाओं के अधिकारों को सशक्त किया और स्वास्थ्य, समानता व कल्याण को एक मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित करने के लिए कई कानूनी सुधार किए। उनके शासन में लाए गए विधायी बदलावों ने चिली में समानता, स्वतंत्रता और मानव अधिकारों को एक ठोस दिशा दी, जो दुनियाभर के लोकतांत्रिक समाजों के लिए एक आदर्श है।

सोनिया गांधी ने कहा कि मिशेल बैचेलेट उन मूल्यों का जीवंत प्रतीक हैं जिन्हें इंदिरा गांधी ने अपने जीवन का मिशन बनाया था—शांति, सामाजिक विकास, महिला सशक्तीकरण, मानवाधिकार और वैश्विक न्याय। इसी कारण इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया जाना पूरी तरह उपयुक्त और गौरवपूर्ण है। यह पुरस्कार न केवल एक सम्मान है, बल्कि उन वैश्विक नेताओं का उत्सव भी है जो कठिन समय में भी मानवता, न्याय और प्रगति की मशाल जलाए रखते हैं।

अपने संबोधन के दूसरे भाग में सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी के विशाल योगदान की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि 1985 में स्थापित यह पुरस्कार इंदिरा गांधी की विरासत को आगे बढ़ाने का एक माध्यम है, जो उन व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित करता है जिन्होंने शांति, निरस्त्रीकरण, सामाजिक विकास और मानव कल्याण के लिए असाधारण काम किया है। उन्होंने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी भारत की पहली और अब तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री थीं, जिन्होंने गरीबी, असमानता, संघर्ष और पिछड़ेपन को समाप्त करने के लिए साहसिक नीतियाँ लागू कीं। उनकी प्रसिद्ध पंक्ति—“शांति इसलिए चाहिए क्योंकि हमें गरीबी, बीमारी और अज्ञानता के खिलाफ दूसरा युद्ध लड़ना है”—आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उनके समय में थी।

सोनिया गांधी ने जोर देकर कहा कि इंदिरा गांधी का विश्वास था कि हर आदमी को बिना उत्पीड़न, बिना भेदभाव और बिना गरीबी के जीने का अधिकार है। उनका जीवन मानवता, करुणा, दृढ़ नेतृत्व और अहिंसा के प्रति अटूट आस्था का उदाहरण था। यही कारण है कि उनकी विरासत भारत ही नहीं, दुनिया भर में आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

अपने समापन शब्दों में सोनिया गांधी ने कहा कि मिशेल बैचेलेट का सम्मान करके हम केवल एक नेता को नहीं, बल्कि इंदिरा गांधी के उस अद्भुत विचार को सलाम कर रहे हैं जो आज भी दुनिया की दिशा तय करने की क्षमता रखता है—एक ऐसी दुनिया जहाँ शांति, समानता, न्याय और मानव गरिमा केवल आदर्श नहीं, बल्कि हर इंसान का अधिकार हो।

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