लगभग एक साल तक चले किसान आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की। यह फैसला गुरु नानक जयंती के दिन लिया गया, जिसे सुलह का प्रतीक माना गया। आंदोलन के दौरान सैकड़ों किसानों की मौत, कई बार वार्ता विफल होना और लगातार विरोध ने सरकार को यह निर्णय लेने पर मजबूर किया। 29 नवंबर को संसद में विधिवत कानून रद्द कर दिए गए। यह फैसला लोकतांत्रिक आंदोलनों की ताकत और जनभावनाओं की जीत के रूप में देखा गया। किसानों ने इसे अपनी जीत बताया, लेकिन MSP गारंटी की मांग जारी रखी।




