आलोक कुमार | नई दिल्ली 18 नवंबर 2025
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि राहुल गांधी पर लगातार व्यक्तिगत हमला, मीडिया ट्रायल, और चरित्र हनन की मुहिम यह सबूत है कि सत्ता पक्ष बुरी तरह डर गया है। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी के आरोप बेबुनियाद होते, तो सरकार को शांत और मजबूत होकर जवाब देना चाहिए था। लेकिन आज हालात उलटे हैं—राहुल गांधी के हर सवाल का जवाब देने के बजाय उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “यह हमला इसलिए है क्योंकि राहुल गांधी ने ऐसे सवाल पूछे हैं जिनका सामना करने से सरकार डरती है—सवाल जो चुनावी प्रक्रिया की सच्चाई को सामने लाते हैं।” उन्होंने कहा कि यही कारण है कि हर स्तर पर, सोशल मीडिया से लेकर बड़े टीवी चैनलों तक, राहुल गांधी को बदनाम करने का अभियान चलाया जा रहा है—ताकि लोग मुद्दे की गंभीरता भूल जाएँ और ध्यान असल प्रश्नों से हट जाए।
इस तरह से कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने देश की चुनावी प्रणाली पर एक बार फिर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अब भारत में “वोटर फ्रॉड” को लेकर किसी भी तरह की अटकलें बाकी नहीं हैं—लाखों नागरिक अब साफ़ समझ चुके हैं कि चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ हो रही हैं। सुप्रिया ने कहा कि भारतीय जनता को इन अनियमितताओं का पता इसलिए चल पाया, क्योंकि राहुल गांधी ने लगातार देश के सामने यह मुद्दा उठाया, सबूत दिए और दलीलों के साथ बताया कि किस तरह फर्जी वोट, एक ही व्यक्ति के कई वोटर ID, फर्जी पते, और एक कमरे में सैकड़ों लोगों का रजिस्ट्रेशन चुनावी प्रक्रिया को अंदर से खा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा किसी पार्टी का नहीं भारतीय लोकतंत्र की जड़ पर सीधा हमला है, और इसका पता जनता को तब ही चला जब राहुल गांधी ने इसे खुलकर उठाया। इस बीच बीजेपी बौखलाई हुई है और वो तरह तरह से राहुल गांधी पर हमले का प्रयास कर रही है। कांग्रेस ने कहा राहुल गांधी पर हुए हमले सत्ता की घबराहट का प्रमाण हैं। कांग्रेस ने कहा कि अगर वोट चोरी के आरोप झूठे हैं तो डर किस बात का है?
“राहुल गांधी ने मोदी–ECI के असहज गठजोड़ को उजागर किया”—डेटा मांगने पर चुनाव आयोग चुप क्यों? कांग्रेस का सवाल
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि राहुल गांधी ने न केवल आरोप लगाए, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से चुनाव आयोग से सवाल किए, दस्तावेज़ मांगे और पारदर्शिता की मांग की—जो एक जिम्मेदार विपक्षी नेता का कर्तव्य है। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बार-बार औपचारिक डेटा देने से इनकार किया। सुप्रिया ने सवाल उठाया कि यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो चुनाव आयोग जानकारी देने से क्यों बच रहा है? उन्होंने कहा कि यही चुप्पी यह दिखाती है कि मोदी सरकार और ECI के बीच एक “अनैतिक साझेदारी” मौजूद है, जिसका उद्देश्य चुनावी ढांचा अपने नियंत्रण में लेना है। उनके अनुसार राहुल गांधी की ओर से उठाए गए सवालों ने पहली बार पूरे देश में यह बहस खड़ी कर दी कि क्या भारत में चुनाव आयोग वास्तव में स्वतंत्र है—या फिर वह केंद्र सरकार का एक राजनीतिक औजार बन चुका है।
“ECI राज्यों में मनमर्जी से लाखों वोटों को हटा–जोड़ रहा है”—सुप्रिया का गंभीर आरोप, लोकतंत्र की रीढ़ पर चोट
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि चुनाव आयोग का सबसे खतरनाक कदम यह है कि वह बिना पारदर्शिता और बिना समझाए—राज्यों में लाखों वोटरों को हटा भी रहा है और जोड़ भी। उन्होंने कहा कि यह काम चुपचाप और बिना किसी जांच-संतुलन के किया जा रहा है। बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, असम—लगभग हर राज्य से शिकायतें आ रही हैं कि SIR और चुनावी संशोधन के नाम पर लाखों वैध वोटरों को हटाया गया और लाखों संदिग्ध प्रविष्टियाँ जोड़ दी गईं। सुप्रिया ने कहा कि जब मतदाता सूची ही भरोसेमंद नहीं रहेगी, तो चुनाव को लोकतांत्रिक कहने का कोई मतलब नहीं बचेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह केवल चुनावी अनियमितता नहीं—यह लोकतंत्र के उस मूल भरोसे पर हमला है जिस पर पूरी व्यवस्था खड़ी है। यह तयशुदा परिणामों का रास्ता साफ करने की कोशिश है और यह जनता के अधिकारों का सीधा हनन है।
सुप्रिया श्रीनेत की चेतावनी: “सोचिए—अगर राहुल गांधी की आवाज़ दबाई जा रही है, तो असल में आपकी आवाज़ दबाई जा रही है”
अंत में सुप्रिया श्रीनेत ने बेहद भावनात्मक और सीधी अपील की। उन्होंने कहा कि कई लोग बिना समझे राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे ‘विच-हंट’ का हिस्सा बन जाते हैं। लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि यह हमला सिर्फ राहुल गांधी पर नहीं है—यह भारतीय नागरिक की आवाज़ पर हमला है। उन्होंने कहा:“They’re not really after Rahul Gandhi — they’re actually after you. Rahul is just in the way.”
सुप्रिया ने कहा कि वोट चोरी कांग्रेस या भाजपा का मुद्दा नहीं—यह भारत का मुद्दा है। यह हर नागरिक के वोट और अधिकार का सवाल है। उन्होंने कहा कि यदि जनता आज जवाब नहीं मांगेगी, तो कल लोकतंत्र का ढांचा पूरी तरह नियंत्रण में आ जाएगा। उन्होंने जनता से अपील की—“सवाल पूछिए, जवाब मांगिए। क्योंकि वे जिस आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, वह आपकी ही आवाज़ है।”




