नई दिल्ली 13 नवंबर 2025
एयर इंडिया उड़ान दुर्घटना पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने पूरे विमानन क्षेत्र, नियामक संस्थानों और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारियों को एक बार फिर कठोर रूप से उजागर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि विमान हादसों की जांच का असली मकसद “किसे दोषी ठहराया जाए” यह तय करना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना है कि ऐसा हुआ क्यों, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। अदालत ने माना कि Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) एक तकनीकी और विशेषज्ञ एजेंसी है, जिसका दायरा किसी को सजा दिलाना नहीं, बल्कि विमानन सुरक्षा के लिए कारणों और खामियों की पहचान करना है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि हादसे के बाद भी यह चिंता जरूरी है कि जांच का केंद्र दोषारोपण नहीं बल्कि सुधार हो।
सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट में पायलट को दोषी नहीं ठहराया गया है। यह स्पष्ट किया गया कि जांच अभी जारी है और जो तकनीकी तथ्य सामने आए हैं, वे केवल शुरुआती स्तर की जानकारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण का संज्ञान लेते हुए कहा कि विमान हादसा एक अत्यंत तकनीकी मामला है—इंजन, कॉकपिट, सेंसर, स्विच, प्रशिक्षण, मेंटेनेंस और मौसम—इन सभी पहलुओं को बिना किसी पूर्वाग्रह के जांचा जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि जांच को ICAO (अंतरराष्ट्रीय सिविल एविएशन संगठन) के मानकों और स्वतंत्रता के अनुरूप होना चाहिए ताकि विश्व स्तर पर भारतीय रिपोर्ट पर भरोसा किया जा सके।
इस त्रासदी की पृष्ठभूमि बेहद दर्दनाक रही है। अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की उड़ान टेक-ऑफ के दौरान ही दुर्घटना का शिकार हुई, जिसमें लगभग सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्य मारे गए। प्रारंभिक तकनीकी रिपोर्टों में संकेत मिले कि विमान के दोनों इंजनों का थ्रस्ट अचानक कम हो गया था क्योंकि इंजन स्विच ‘RUN’ से सीधे ‘CUTOFF’ मोड में चले गए। लेकिन यह क्यों हुआ, किसने किया, या क्या यह तकनीकी खराबी थी—यह अभी जांच के अधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे संवेदनशील प्रश्नों पर अटकलें लगाने की जगह सटीक और वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
कई परिवारों, विशेषज्ञों और पूर्व पायलटों ने कहा है कि केवल मानव-त्रुटि को कारण बताकर जांच खत्म नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इन चिंताओं का सम्मान करते हुए कहा कि यह जांच व्यापक, निष्पक्ष और बहु-स्तरीय होनी चाहिए। इसमें निर्माता कंपनी, एयरलाइन प्रबंधन, तकनीकी टीम, कंट्रोल-रूम सिस्टम और मेंटेनेंस रिकॉर्ड—सबका क्रॉस-ऑडिट शामिल होना चाहिए। अदालत ने साफ कहा कि “अगर हम केवल दोषी की तलाश में उलझ गए, तो असली उद्देश्य—अगली दुर्घटना को रोकना—पीछे छूट जाएगा।”
अदालत ने यह भी कहा कि विमानन सुरक्षा केवल रिपोर्टों से नहीं, बल्कि उन रिपोर्टों के आधार पर लागू होने वाले सुधारों से मजबूत होती है। AAIB, DGCA, एयरलाइनों और सरकार—सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि इस त्रासदी से सीख ली जाए और विमानन सुरक्षा के मानकों को और सख्त किया जाए। सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है: विमान दुर्घटनाएँ केवल तकनीकी विफलताएँ नहीं होतीं, बल्कि सुरक्षा तंत्र, प्रशिक्षण, संसाधनों, निगरानी और मानवीय व्यवहार की संयुक्त परीक्षा होती हैं।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि एयर इंडिया क्रैश की जांच जल्दबाज़ी में किसी को दोषी ठहराने की प्रक्रिया नहीं बनेगी, बल्कि एक गंभीर, वैज्ञानिक और भविष्य-केंद्रित समीक्षा होगी—ताकि ऐसी त्रासदियों से देश को दोबारा न गुजरना पड़े।




