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पलक मुच्छल का मानवीय चमत्कार—3800 बच्चों को नई ज़िंदगी देने वाली ‘सुरों की परी’ बनी विश्व रिकॉर्ड धारक

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मुंबई 11 नवंबर 2025

बॉलीवुड की मधुर, दिल को छू लेने वाली आवाज़ और अनगिनत सुपरहिट गीतों के लिए जानी जाने वाली पलक मुच्छल ने इस बार ऐसा काम किया है, जो किसी भी कलाकार की सीमाओं से बहुत आगे जाकर मानवता के इतिहास में दर्ज होता है। इंडौर में जन्मी यह युवा गायिका अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल हो चुकी हैं—लेकिन यह रिकॉर्ड उनके संगीत के लिए नहीं, बल्कि 3,800 से अधिक गरीब और जरूरतमंद बच्चों के दिल की सर्जरी कराकर उन्हें ज़िंदगी देने के लिए है।

पलक की परोपकार यात्रा किसी बड़ी योजना से नहीं, बल्कि एक भावनात्मक बचपन की घटना से शुरू हुई थी। बचपन में एक ट्रेन यात्रा के दौरान उन्होंने बेहद गरीब और बीमार बच्चों को देखा—और उसी क्षण उन्होंने स्वयं से एक वादा किया: “एक दिन मैं इनकी मदद जरूर करूँगी।” वर्षों बाद यह छोटी-सी प्रतिज्ञा एक विशाल मानवतावादी मिशन में बदल गई, जिसे आज दुनिया Palak-Palash Charitable Foundation के नाम से जानती है। पलक अपने हर कॉन्सर्ट की कमाई, हर निजी बचत और हर संभव संसाधन उन बच्चों की सर्जरी में लगाती हैं, जिनके दिल धड़कने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं।

सिर्फ मेडिकल मदद ही नहीं—पलक समाज और देश के प्रति लगातार सक्रिय रही हैं। उन्होंने कारगिल शहीदों के परिवारों की सहायता, गुजरात भूकंप पीड़ितों को 10 लाख रुपये का सहयोग, और कई राहत अभियानों में बढ़-चढ़कर योगदान दिया। उनकी दानशीलता किसी इवेंट का हिस्सा नहीं, बल्कि उनका जीवन-मंत्र बन चुकी है।

संगीत की दुनिया में ‘मेरी आशिक़ी’, ‘कौन तुझे’, ‘तेरा मेरा रिश्ता’, ‘प्रेम रतन धन पायो’ जैसे गीतों ने पलक को देश की चहेती आवाज़ बनाया, लेकिन उनकी लोकप्रियता ने उनके मिशन को कभी धीमा नहीं किया। पलक के सुरों से निकला हर गीत किसी न किसी बच्चे की सांस बचाने के लिए धन एकत्र करता रहा।

उनकी इस यात्रा में उनके पति और मशहूर संगीतकार मिथुन हमेशा उनके साथ मजबूती से खड़े रहे। उनका वह बयान आज भी लोगों के दिलों में गूंजता है—“चाहे शो न हो, कमाई न हो… लेकिन एक बच्चे की सर्जरी कभी नहीं रुकेगी।” यह शब्द सिर्फ समर्थन नहीं, बल्कि एक साझा संकल्प का ऐलान हैं—एक ऐसा मिशन जो इंसानियत को सर्वोच्च मानता है।

आज जब पलक मुच्छल का नाम गिनीज रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है, तो यह सम्मान सिर्फ एक कलाकार का नहीं, बल्कि उन 3,800 बच्चों की धड़कनों का उत्सव है जिन्हें उन्होंने नई जिंदगी दी। यह उन परिवारों की मुस्कुराहट का प्रमाण है, जो कभी अस्पताल के बरामदों में अपने बच्चों के लिए दुआ माँगते थे। पलक मुच्छल ने साबित कर दिया है कि संगीत सिर्फ सुनने की चीज़ नहीं—यह किसी की ज़िंदगी बचाने का माध्यम भी हो सकता है।

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