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20 साल का हिसाब विफल — बिहार में महागठबंधन का विकास प्रहार, BJP-JDU घिरी

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पटना/ नई दिल्ली 10 नवंबर 2025

बिहार में चुनावी सरगर्मी अपने पूरे उफान पर है और इसी बीच महागठबंधन ने एक व्यापक, साहसिक और लोककल्याणकारी वादा-पत्र जारी करते हुए राज्य की राजनीति को नए विमर्श में ढाल दिया है। जनता की रोज़मर्रा की समस्याओं से लेकर दीर्घकालिक विकास तक, गठबंधन ने अपने मेनिफेस्टो में ऐसे फैसले शामिल किए हैं जो आम परिवारों को सीधी राहत और लंबे समय का भरोसा दिलाते हैं। 200 यूनिट मुफ्त बिजली, 500 रुपये में गैस सिलेंडर, महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा, हर परिवार के एक सदस्य को नौकरी, और 25 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज—इन वादों ने महागठबंधन के एजेंडे को जनता की उम्मीदों से सीधे जोड़ दिया है। इसके साथ ही महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता, जीविका दीदियों को सरकारी दर्जा, किसानों को 24 घंटे मुफ्त बिजली, मनरेगा मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन, युवाओं के लिए परीक्षा फॉर्म शुल्क खत्म करने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने जैसे कदम गठबंधन के संकल्पों को और मजबूत बनाते हैं। आरक्षण सीमा 50 फीसदी से बढ़ाना, दलित उत्पीड़न के लिए विशेष अदालतें बनाना और बाढ़–सूखा प्रबंधन की नई प्रणाली तैयार करना इस घोषणा पत्र को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में एक ठोस दस्तावेज बनाता है।

महागठबंधन के नेताओं ने इस दौरान BJP-JDU पर तीखे हमले भी किए। कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह ने कहा कि 20 साल तक सत्ता में रहने के बाद भी बिहार अपराध, बेरोजगारी, निवेश और कानून व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दों से जूझ रहा है। उनके अनुसार गुंडाराज चरम पर है, कानून व्यवस्था कमजोर है और कंपनियां बिहार की जमीन पर कदम रखने से कतराती हैं। भाजपा-जेडीयू “घुसपैठिया” जैसे मुद्दे उछालकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि असल विकास से उनका कोई मतलब नहीं रहा।

कांग्रेस महासचिव नासिर हुसैन ने सभा में कहा कि BJP-JDU को जनता के सामने अपना 20 साल का रिपोर्ट कार्ड पेश करना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय उन्होंने “कट्टा, दुनाली, घुसपैठिया” जैसे विचलित करने वाले मुद्दे उठाकर अपनी नाकामी को छिपाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में विकास का एक भी काम नहीं बताया और न ही नीतीश कुमार 20 साल के अपने काम का विवरण दे सके। नासिर ने कहा कि अगर BJP रोजगार नहीं दे पाई, तो अब वे कांग्रेस से पूछ रहे हैं कि नौकरी कैसे देंगे—यह सवाल ही उनकी विफलता का प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि BJP-JDU ने महागठबंधन का मेनिफेस्टो चोरी किया है, क्योंकि उनके पास खुद कोई विज़न नहीं बचा है।

विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता डॉक्टर मदन मोहन झा ने कहा कि महागठबंधन जहां रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर जनता के साथ खड़ा है, वहीं BJP के नेता कट्टा-कनपटी और अपहरण जैसे शब्दों में पूरी चुनावी बहस को धकेल रहे हैं। पहले चरण के बाद ही हालात यह बता रहे हैं कि डबल इंजन सरकार के दोनों इंजन अलग-अलग दिशाओं में खिंच रहे हैं।

कौकब कादरी ने कहा कि हमारी राजनीति भविष्य की है जबकि नरेंद्र मोदी बिहार को इतिहास में उलझाकर वास्तविक मुद्दों से दूर करना चाहते हैं। वहीं कांग्रेस नेता अनुपम ने बिहार के भविष्य की रूपरेखा गिनाते हुए कहा कि राज्य को महान बनाने के लिए छात्रों को पढ़ाई, युवाओं को कमाई, बुजुर्गों को दवाई, वंचितों को भागीदारी, महिलाओं को सम्मान और किसानों को अधिकार देना अनिवार्य है। यही वह समग्र दृष्टि है जो बिहार की असली तस्वीर बदल सकती है।

बिहार इस समय परिवर्तन के निर्णायक मोड़ पर है। 20 साल की सरकार के बाद भी BJP-JDU जनता को ठोस उपलब्धियां नहीं गिना पा रही, और इसी खालीपन के बीच महागठबंधन का विस्तृत, विश्वसनीय और ज़मीन से जुड़ा मेनिफेस्टो एक नई उम्मीद जगाता है। चुनावी हवा में अब यह स्पष्ट संकेत दिख रहा है कि जनता इस बार वास्तविक मुद्दों और व्यापक विकास के पक्ष में खड़ी होती दिखाई दे रही है—और इसी ऊर्जा के साथ महागठबंधन बिहार में सत्ता की ओर बढ़ रहा है।

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