अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो 9 नवंबर 2025
जापान में सौ वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या विश्व में सर्वाधिक है — लेकिन इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि ये बुजुर्ग लोग न सिर्फ ज़िंदा हैं, बल्कि स्वस्थ, सक्रिय और जीवन के काम में लगे हुए दिखाई देते हैं। जापानी द्वीपवर्ती क्षेत्र ओकिनावा में ऐसा विशेष रूप से देखा गया है, जहाँ 100 वर्ष के करीब उम्र वाले लोगों में से बहुत से लोग प्रतिदिन हल्की-मोटी गतिविधियाँ स्वयं करते हैं — उदाहरण के लिए चालक हैं, या बगीचे की देखभाल करते हैं।
उनके इस स्वस्थ, दीर्घजीवित जीवन का रहस्य जापानी लोगों की लाइफस्टाइल, खान-पान, मानसिक दृष्टिकोण और सामाजिक संरचना में छिपा हुआ है। उदाहरण के लिए, वहाँ के बुजुर्ग यह नियम अपनाते हैं कि उम्र चाहे कितनी भी हो जाए, अपने बच्चों पर निर्भर नहीं होना; खुद की देखभाल करना; दूसरों के साथ मिलकर रहना; और “इकिगाई” (Ikigai)-वाला दृष्टिकोण अपनाना — यानी जीवन का उद्देश्य, जिसे पूरा करते रहना।
खान-पान की आदतें भी इस लंबी उम्र का एक बड़ा कारक हैं। जापानी बुजुर्गों का भोजन विविधतापूर्ण होता है — सब्जियाँ और फल बहुतायत में, कई तरह के पदार्थ रोज़ शामिल होते हैं। उदाहरण के लिए, ओकिनावा के एक सर्वे में यह पाया गया कि वहाँ के लंबी उम्र के लोगों ने लगभग 206 प्रकार के खाद्य पदार्थ खाए हैं, और उनका भोजन डिज़ाइन इस तरह से होता है कि पेट लगभग 80 % भरते ही खाना छोड़ दिया जाता है।
साथ ही, इन लोगों की दिनचर्या में रात जल्दी सोना-सुबह जल्दी उठना, बगीचे या छोटे खेत में काम करना, हल्का व्यायाम या टहलना, सामाजिक मेल-मिलाप और दोस्तों-परिवार के बीच सक्रियता जैसी चीजें शामिल हैं। इन सबने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि उम्र बढ़ने के बावजूद उनके जीवन की गुणवत्ता (quality of life) बनी रहे।
इसके अलावा, मानसिक दृष्टिकोण में भी एक बड़ा अंतर है — जापानी लंबी उम्र वाले लोग अक्सर “अतीत की चिंता” या “भविष्य का तनाव” नहीं करते; वे वर्तमान में उपस्थित रहते हैं और जीवन को तनाव से मुक्त तरीके से जीते हैं। यह आत्म-निर्भरता, सामाजिक सामजस्य और मानसिक दृढ़ता उन्हें केवल सौ साल तक जीवित नहीं रहने देती बल्कि सक्रिय, स्वस्थ और लाभप्रद जीवन देती है।
तो सब मिलाकर, जापान में लंबी उम्र का राज सिर्फ एक कारण से नहीं निहित है — यह एक समग्र जीवन-शैली, सामाजिक संरचना, भोजन-विचार-विनोद-सक्रियता का मिश्रण है। अगर हम इस मॉडल से सीख लें, तो यह सिर्फ “ज़्यादा जीना” नहीं, बल्कि “बेहतर जीना” संभव हो सकता है।




