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बिहार में मोदी के झूठ का पर्दाफाश — मजदूरों से 12 घंटे काम, पूंजीपतियों से प्यार, बिहारियों का अपमान

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पटना, 8 नवंबर 2025

बिहार के चुनावी रण में अब मुकाबला सिर्फ वोट का नहीं, सत्य और छल का युद्ध बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे और भाषणों के बीच कांग्रेस ने सीधे-सीधे उन पर तीखा हमला बोला है। गुजरात कांग्रेस के तेजतर्रार नेता जिग्नेश मेवानी ने मोदी पर करारा वार करते हुए कहा कि “नरेंद्र मोदी बिहार में बड़ी-बड़ी डींगे हांक रहे हैं, मजदूरों के लिए सहानुभूति का दिखावा कर रहे हैं, जबकि गुजरात में वही सरकार कानून बना रही है जिससे मजदूरों से 12 घंटे काम करवाया जा सके। यानी, एक तरफ़ भाषणों में ‘गरीबों का मसीहा’ और ज़मीनी हकीकत में श्रमिकों का शोषणकर्ता।”

मेवानी का हमला यहीं नहीं रुका। उन्होंने कहा कि “जब पूरी दुनिया में चर्चा है कि काम के घंटे 8 से घटाकर 6 करने चाहिए, तब मोदी और गुजरात के मुख्यमंत्री मजदूरों का खून चूसने वाली नीति बना रहे हैं। मोदी का दिल सिर्फ़ पूंजीपतियों के लिए धड़कता है, जबकि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी का दिल किसानों और मजदूरों के लिए।” उन्होंने तीखे अंदाज़ में कहा कि “अडानी को बिहार में 1050 एकड़ जमीन दी गई है, जबकि गुजरात में मोदी ने अपने उद्योगपति दोस्तों को एक लाख एकड़ जमीन मुफ्त में लुटा दी, लेकिन किसी ने सवाल नहीं उठाया क्योंकि पूरा तंत्र अब पूंजी के इशारे पर नाचता है।”

मेवानी ने बिहार की जनता से अपील करते हुए कहा, “बिहार के लोगों को अब समझना होगा कि नरेंद्र मोदी का ‘विकास मॉडल’ सिर्फ़ झूठे भाषणों और अमीरों की तिजोरियों तक सीमित है। जो आदमी मजदूर का खून निचोड़ने वाला कानून बनाता है, वह बिहार आकर मजदूरों के आँसू पोंछने का नाटक क्यों कर रहा है?” मेवानी ने बिहार के सभी महापुरुषों को नमन करते हुए कहा, “बिहार वह धरती है जिसने देश को दिशा दी, लेकिन मोदी सरकार ने इसी धरती के मेहनतकश मजदूरों को सबसे ज़्यादा ठगा है। हमारे मजदूर भाई देश के अलग-अलग हिस्सों को अपने खून-पसीने से बनाते हैं, लेकिन उन्हें न न्यूनतम वेतन मिलता है, न सम्मान, न सुरक्षा। ये कैसा ‘अमृतकाल’ है जिसमें गरीब और मजदूर सिर्फ़ दुख पीने को मजबूर हैं?”

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता और AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बिहारी अस्मिता का अपमान करने का आरोप लगाया है। खेड़ा ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की जनता का घोर अपमान किया है। उनका यह कहना कि ‘बिहार में फैशन है — कट्टा लाते हैं, हैंड्स अप करवाते हैं’ यह न केवल बिहार की संस्कृति और मेहनतकश समाज का मज़ाक उड़ाना है, बल्कि यह उस राज्य की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला बयान है जिसने देश के निर्माण में सबसे ज़्यादा योगदान दिया है।”

पवन खेड़ा ने गुस्से में कहा — “नरेंद्र मोदी को पूरे बिहार से माफी मांगनी चाहिए। बिहार वह धरती है जो आपको आसमान पर चढ़ा सकती है, लेकिन दो मिनट में जमीन पर गिरा भी सकती है। मोदी जी भूल गए हैं कि बिहार की जनता अपमान नहीं सहती। यह राज्य शौर्य, श्रम और स्वाभिमान की मिट्टी से बना है, जहाँ कट्टा नहीं, कर्मठता फैशन है। मोदी जी ने जो कहा है, वह केवल बिहार का नहीं, पूरे उत्तर भारत के मेहनतकशों का अपमान है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मेवानी और खेड़ा के बयान ने बिहार के चुनावी माहौल में नैरेटिव को पूरी तरह पलट दिया है। जहाँ मोदी विकास और आत्मनिर्भरता की बात कर रहे हैं, वहीं विपक्ष उन्हें “पूंजीपतियों का ठेकेदार और मजदूरों का शोषक” बता रहा है। मेवानी की बातों ने उस वर्ग को झकझोरा है जो अब तक चुपचाप मेहनत करता रहा — दिहाड़ी मजदूर, फैक्ट्री कर्मी, खेतिहर मज़दूर। इन लोगों को लगता है कि मोदी के “12 घंटे कानून” के बाद अब उनकी ज़िंदगी और मुश्किल हो जाएगी।

बिहार की राजनीति में यह हमला महज़ भाषण नहीं, बल्कि जनता के जख्मों पर उभरी चीख है। मेवानी ने बिहारियों के दिल में सीधे चोट करते हुए कहा — “मोदी जी बिहार के मजदूरों के कंधे पर चढ़कर दिल्ली पहुँचे हैं, लेकिन आज वही मजदूर अपने गाँव लौटकर बेरोजगारी और भूख से मरने को मजबूर हैं। मोदी जी ने मजदूरों को सपनों का भारत नहीं दिया, बल्कि श्रमिकों की जंजीरों वाला गुजरात मॉडल दिया।”

अब बिहार में चर्चा है कि क्या यह वही प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने कभी कहा था “मैं खुद चाय बेचता था, गरीब का बेटा हूँ”? मेवानी ने पलटवार करते हुए कहा, “गरीब का बेटा अब गरीब के खून से उद्योगपतियों का साम्राज्य बना रहा है। गुजरात से लेकर बिहार तक मोदी का एक ही मॉडल है — मजदूरों का शोषण और पूंजीपतियों का उत्थान।”

पवन खेड़ा के बयान ने भी यह साफ़ कर दिया है कि कांग्रेस अब केवल जवाब नहीं दे रही, बल्कि प्रत्याक्रमण की मुद्रा में है। मोदी पर सीधा वार करते हुए उन्होंने कहा — “अगर नरेंद्र मोदी में ज़रा भी संवेदना बाकी है तो वे बिहार की जनता से माफी मांगें। क्योंकि बिहार सिर्फ़ वोट बैंक नहीं, यह भारत का हृदय है। और जो इस हृदय को अपमानित करेगा, जनता उसका दिल तोड़ देगी।”

अब सवाल उठ रहा है — क्या मोदी के विकास के भाषण बिहार में असर डाल पाएंगे, जब जनता के सामने मजदूरों की यह सच्चाई खुल चुकी है? क्या बिहार के लोग उस “12 घंटे कानून” को भूल जाएंगे, जो उनकी ही तरह के गरीबों पर थोप दिया गया? और क्या बिहार की मिट्टी उस “कट्टा फैशन” वाले बयान को माफ़ करेगी?

एक बात अब तय है —बिहार में हवा बदल रही है। मोदी के भाषणों की चमक के पीछे मजदूरों का पसीना बह रहा है, और कांग्रेस ने उसी पसीने को हथियार बना दिया है।

 

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