एक दिन, दो विरासतें — देश की एकता और बलिदान का प्रतीक
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आज दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि यह दिन भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण और भावनात्मक है। “एक तरफ हम लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती मना रहे हैं, तो दूसरी ओर यह दिन भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री, ‘आयरन लेडी’ श्रीमती इंदिरा गांधी जी की शहादत का प्रतीक है,” खड़गे ने कहा। उन्होंने जोड़ा कि दोनों नेताओं ने देश की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए अपना जीवन समर्पित किया। सरदार पटेल ने जहां देश को जोड़ने का कार्य किया, वहीं इंदिरा गांधी ने देश की एकता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। “यही कांग्रेस की परंपरा है, यही राष्ट्रनिर्माण में उसका योगदान है,” खड़गे ने भावनात्मक स्वर में कहा।
“लौहपुरुष” और “आयरन लेडी” की विरासत पर प्रहार
खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि “बीजेपी और आरएसएस उन नेताओं के नाम का इस्तेमाल कर रही हैं जिनके विचारों से वे जीवन भर असहमत रहे। यह विडंबना नहीं तो और क्या है कि जो संगठन गांधी जी की हत्या के बाद बैन किया गया था, वही आज देश के प्रशासनिक तंत्र में घुसपैठ कर रहा है।” खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार ने 9 जुलाई 2024 को वह बैन हटा लिया, जो सरदार पटेल ने आरएसएस और जमाते इस्लामी जैसी संस्थाओं पर लगाया था ताकि सरकारी कर्मचारियों को सांप्रदायिक संगठनों से दूर रखा जा सके। उन्होंने कहा, “गांधी जी की हत्या के पीछे जिनकी विचारधारा थी, आज उन्हीं के साथ सरकार खड़ी है — यह देश की आत्मा के साथ विश्वासघात है।”
नेहरू-पटेल के संबंधों पर झूठ फैलाती बीजेपी
कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह नेहरू और पटेल के संबंधों को लेकर झूठा नैरेटिव फैलाने में लगी है। उन्होंने कहा कि “बीजेपी के नेता बार-बार कहते हैं कि नेहरू जी और सरदार पटेल में मतभेद था, जबकि यह पूरी तरह झूठ है।” खड़गे ने सरदार पटेल और पंडित नेहरू के पारस्परिक सम्मान के उदाहरण देते हुए कहा — “नेहरू जी ने सरदार पटेल को ‘भारत की एकता का शिल्पी’ कहा था, जबकि पटेल जी ने नेहरू को ‘देश का आदर्श और जनता का नेता’ बताया था।” उन्होंने सरदार पटेल का ऐतिहासिक कथन उद्धृत किया — “पिछले दो कठिन वर्षों में नेहरू जी ने देश के लिए जो अथक परिश्रम किया है, वो मुझसे अधिक अच्छी तरह कोई नहीं जानता। देश के आदर्श, जनता के नेता, राष्ट्र के प्रधानमंत्री और सबके लाडले जवाहरलाल के महान कृतित्व का भव्य इतिहास सबके सामने खुली किताब है।” खड़गे ने कहा कि “इतिहास को फाड़ा जा सकता है, लेकिन बदला नहीं जा सकता। जो सत्य मिटाने की कोशिश करेगा, वह खुद मिट जाएगा।”
इतिहास मिटाने की साज़िश: NCERT से गांधी और गोडसे गायब
खड़गे ने हाल ही में NCERT की तीन पाठ्यपुस्तकों से गांधी जी, गोडसे, आरएसएस और 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े अध्याय हटाने पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि “सरकार अब सच्चाई को मिटाकर झूठ को स्थापित करना चाहती है। यह लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक संकेत है।” उन्होंने कहा कि इतिहास को विकृत करने की यह नीति नई पीढ़ी को अंधेरे में रखने की साज़िश है। “जो सरकार अपने अतीत से डरती है, वह अपने भविष्य को भी अंधेरे में धकेल देती है,” खड़गे ने कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि “कांग्रेस ने सच्चाई के लिए हमेशा संघर्ष किया है और आगे भी करती रहेगी। चाहे पाठ्यपुस्तक से नाम मिटा दो, लेकिन गांधी, नेहरू और पटेल का इतिहास इस देश की मिट्टी में लिखा है — उसे कोई नहीं मिटा सकता।”
सरदार पटेल का पत्र उजागर करता है आरएसएस की सच्चाई
खड़गे ने सरदार पटेल द्वारा 4 फरवरी 1948 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे गए पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि “जो लोग आज पटेल जी के नाम पर राजनीति करते हैं, वही उनके विचारों के सबसे बड़े विरोधी हैं।” उन्होंने कहा, “पटेल जी ने अपने पत्र में लिखा था कि गांधी जी की हत्या के बाद आरएसएस ने मिठाइयां बांटी थीं और खुशी मनाई थी। उन्होंने यह भी लिखा था कि संघ और हिंदू महासभा की गतिविधियों से जो ज़हरीला माहौल बना, उसी से गांधी जी की हत्या हुई।” खड़गे ने तीखा सवाल उठाया — “आज उन्हीं संगठनों के लोग कांग्रेस से देशभक्ति का प्रमाण मांग रहे हैं। क्या इससे बड़ा नैतिक दिवालियापन कोई हो सकता है?”
संविधान के रक्षक बनाम संविधान के शत्रु
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरदार पटेल ने संविधान सभा में ‘Fundamental Rights’ और ‘Federal Structure’ के विचार को मज़बूती से समर्थन दिया था। “आज जो लोग संविधान के मूल सिद्धांतों को कमजोर करने की साज़िश रच रहे हैं, वही पटेल के नाम की माला जप रहे हैं,” उन्होंने कहा। खड़गे ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस के नेताओं को सरदार पटेल की विचारधारा की समझ ही नहीं है — “पटेल ने चेतावनी दी थी कि सांप्रदायिक भाषण देश की एकता के लिए ज़हर हैं, लेकिन आज वही ज़हर सत्ता की रणनीति बन चुका है।”
“सच्चाई को मिटाना असंभव है” — खड़गे का अंतिम संदेश
अपने भाषण के अंत में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इतिहास को मिटाने की कोशिश करने वाले कभी सफल नहीं होंगे। “जिन लोगों ने देश की एकता के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, उनकी विरासत को मिटाया नहीं जा सकता। बीजेपी इतिहास के पन्ने फाड़ सकती है, पर उस इतिहास को नहीं बदल सकती जो देश की आत्मा में बस चुका है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा उन लोगों के साथ खड़ी रहेगी जिन्होंने भारत को जोड़ा, न कि तोड़ा।




