इतिहास के प्रतीक दिवस पर लोकतंत्र का मज़ाक
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिहार के सीनियर ऑब्ज़र्वर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज एनडीए पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिस दिन पूरा देश ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और ‘आयरन लेडी’ इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि मना रहा था, उसी दिन बीजेपी ने लोकतंत्र के प्रति अपनी जवाबदेही से मुंह मोड़ लिया। गहलोत ने कहा, “यह दिन देश की एकता, दृढ़ता और बलिदान का प्रतीक है, लेकिन बीजेपी ने 26 सेकंड में अपना घोषणा पत्र पढ़कर प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म करके लोकतंत्र का मज़ाक उड़ा दिया। यह घटना अपने आप में शर्मनाक और असंवेदनशील है।”
सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि आज BJP ने जिस तरह महज चंद सेकंड का फोटोशूट कर ‘संकल्प पत्र’ जारी किया, उसका मतलब साफ है कि नीतीश कुमार को कठपुतली बनाकर सरकार चलाई जा रही है। मेनिफेस्टो लॉन्च के दौरान नीतीश कुमार के साथ जैसा व्यवहार किया गया, वह बिहारियों का अपमान है। यहां तक कि ‘संकल्प पत्र’ भी BJP नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पढ़वाया गया। साफ है- नीतीश सरकार का चेहरा आगे करके उनके वोट बैंक का इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारा यही कहना है कि आज BJP जो JDU और नीतीश कुमार के साथ कर रही है, वही सबके साथ होना है।
26 सेकंड में ख़त्म प्रेस कॉन्फ्रेंस — डर का संकेत
गहलोत ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “यह हमारे जीवन की सबसे छोटी और सबसे बेअसर प्रेस कॉन्फ्रेंस थी।” उन्होंने कहा कि भाजपा और एनडीए के शीर्ष नेता — नीतीश कुमार, जे.पी. नड्डा, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा — बिना एक शब्द बोले मंच से उठकर चले गए। गहलोत ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “नरेंद्र मोदी तो पहले से ही मीडिया से संवाद नहीं करते, लेकिन अब उनके सहयोगी भी पत्रकारों के सवालों से भागने लगे हैं। यह दिखाता है कि बीजेपी लोकतंत्र से नहीं, अब अपने ही वादों से डरने लगी है।”
वादों का हिसाब दें, नये जुमले नहीं
गहलोत ने कहा कि अब जनता नए वादे नहीं, पुराने वादों का हिसाब मांग रही है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार को सवा लाख करोड़ रुपये के पैकेज का वादा किया था, लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने कहा, “मोदी जी ने कहा था कि बिहार में चीनी मिलें फिर से चलेंगी, MSP को कानूनी गारंटी देंगे, युवाओं को रोजगार देंगे, महिलाओं को सशक्त करेंगे और 50 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाएंगे — लेकिन आज बिहार के पास सिर्फ़ जुमले हैं, जमीनी काम नहीं। मोदी और नीतीश की जोड़ी ने बिहार को विकास नहीं, निराशा दी है।”
20 साल सत्ता में और फिर भी ठहराव
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में पिछले 20 वर्षों से नीतीश कुमार सत्ता में हैं और केंद्र में मोदी सरकार को 11 साल हो चुके हैं, लेकिन बिहार आज भी देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि “जब कोई सरकार दो दशक तक सत्ता में रहकर भी शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और उद्योग में बदलाव नहीं ला पाती, तो यह साफ है कि उसकी नीयत में खोट है।” गहलोत ने कहा कि बिहार के युवाओं को रोज़गार नहीं, पलायन मिला है; किसानों को समर्थन मूल्य नहीं, हताशा मिली है; और महिलाओं को सुरक्षा के नाम पर खोखले भाषण मिले हैं।
सवालों से भागती सरकार
गहलोत ने केंद्र सरकार से चार सीधे सवाल पूछे —
- देश भर में पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और केंद्र सरकार इसे रोकने में असफल क्यों है?
- नौकरी मांगने वाले युवाओं पर लाठीचार्ज क्यों किया जा रहा है, क्या यह लोकतंत्र की आवाज़ दबाने का नया तरीका है?
- बिहार और अन्य राज्यों में अपराध का ग्राफ क्यों बढ़ता जा रहा है?
- क्या भाजपा के नेता अब इतने असहज हैं कि मीडिया के सामने अपनी ही सरकार का बचाव नहीं कर पा रहे?
- उन्होंने कहा कि “बीजेपी अब जवाब देने से डरती है, और डर ही उसके पतन की पहली निशानी है।”
संकल्प पत्र’ नहीं, झूठ का पुलिंदा
गहलोत ने एनडीए के घोषणा पत्र को “झूठ का पुलिंदा” बताते हुए कहा कि जब किसी दल के पास अपने किए गए कामों की रिपोर्ट नहीं होती, तो वह भविष्य के सपने दिखाना शुरू कर देता है। उन्होंने कहा, “बीजेपी को जनता से यह बताना चाहिए कि पिछले 20 सालों में बिहार को क्या दिया? कौन-सी नई फैक्ट्री लगी? कितने युवाओं को रोजगार मिला? कौन-सा उद्योग फल-फूल रहा है? सच्चाई यह है कि बिहार को लूटा गया, ठगा गया और अब फिर से छलने की तैयारी की जा रही है।”
महागठबंधन का भरोसा, जनता की उम्मीद
गहलोत ने कहा कि बिहार की जनता अब इस छलावे को पहचान चुकी है। उन्होंने कहा कि जैसे ही महागठबंधन की सरकार आएगी, हर परिवार के एक सदस्य को रोजगार मिलेगा, शिक्षकों और जीविका दीदियों को स्थाई नौकरी दी जाएगी, महिलाओं के लिए सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा।“हम वादा नहीं, जिम्मेदारी निभाएंगे। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, व्यवस्था परिवर्तन का है। बिहार को नया रास्ता दिखाने का समय आ गया है।”
अखिलेश प्रसाद : 20 साल का कोई हिसाब नहीं दिया गया है।
जिस बिहार को शिक्षा का केंद्र माना जाता रहा, वहां शिक्षा की हालत बहुत ख़राब है। स्वास्थ्य सेवा भी चरमरा चुकी है। आज सबसे ज्यादा पलायन बिहार से हो रहा है। सबसे कम आय बिहार के लोगों की है। नीति आयोग के मुताबिक- बिहार कई पैमानों पर सबसे निचले पायदान पर है। एक तरफ कहा जाता है कि बिहार में उद्योगों के लिए जमीन नहीं है, दूसरी तरफ अडानी को 1 रुपए में जमीन दे दी गई।बिहार में अपराध चरम पर है। अकले नीतीश कुमार के राज में 70 हजार से ज्यादा हत्याएं हुईं हैं। आज हर ओर मर्डर हो रहे हैं।




