अलीगढ़ में एक ऐसी चौंकाने वाली साजिश का खुलासा हुआ है जिसने सांप्रदायिक तनाव फैलाने की पूरी योजना को उजागर कर दिया है। थाना लोधा पुलिस ने चार युवकों — जीशान कुमार, आकाश, दिलीप कुमार और अभिषेक सास्त्रवेदी — को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने मुस्लिम विरोधी माहौल बनाने के लिए मंदिर की दीवारों पर “I Love Mohammad” लिखकर पूरे क्षेत्र में अफवाह और नफरत फैलाने की कोशिश की। पुलिस की जांच में साफ हुआ है कि यह हरकत धार्मिक भावना से नहीं, बल्कि एक निजी संपत्ति विवाद में अपने मुस्लिम प्रतिद्वंद्वियों को फँसाने के लिए की गई थी।
थाना लोधा में दर्ज एफआईआर संख्या 258/2025 में आरोपियों पर धारा 191(2)/191(3)/115(2)/352/351(2) BNS सहित कई धाराओं में केस दर्ज हुआ है। अलीगढ़ पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि 25 अक्टूबर को बुलकाकड़ी और भगवानपुर क्षेत्र में यह घटना जानबूझकर की गई थी ताकि माहौल बिगाड़ा जा सके। आरोपी ज़ीशान कुमार उपरोक्त ने अपने साथियों के साथ मिलकर मंदिर की दीवार पर धार्मिक नारे लिखे, और फिर सोशल मीडिया पर इसे फैलाने की योजना बनाई।
पुलिस की जांच में सामने आया:
यह सब कुछ इलाके में चल रहे एक संपत्ति विवाद को लेकर किया गया था। आरोपी पक्ष चाहता था कि अपने प्रतिद्वंद्वी मुस्लिम परिवारों पर सांप्रदायिक रंग चढ़ाकर उन्हें कानूनी और सामाजिक रूप से फँसाया जाए। घटना का मास्टरमाइंड राहुल कुमार नामक व्यक्ति अभी फरार है, जिसके खिलाफ 303/25 नंबर का अलग मुकदमा दर्ज कर पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है।
गिरफ्तार आरोपी:
- जीशांत कुमार पुत्र यशपाल सिंह निवासी ग्राम बुलकाकड़ी, थाना लोधा, अलीगढ़
- आकाश पुत्र सन्तोष सारस्वत निवासी ग्राम भगवानपुर, थाना लोधा, अलीगढ़
- दिलीप कुमार पुत्र रामसरन शर्मा निवासी ग्राम भगवानपुर, थाना लोधा, अलीगढ़
- अभिषेक सारस्वत पुत्र वीरेंद्र शर्मा निवासी ग्राम भगवानपुर, थाना लोधा, अलीगढ़
बरामदगी:
दीवार पर लिखने के लिए प्रयुक्त स्प्रे कैन पुलिस ने मौके से बरामद किया है।
गिरफ्तारी अभियान में शामिल टीमें:
एसपी इंटेलिजेंस की निगरानी में बनी 10 सदस्यीय स्पेशल टीम, जिसमें सर्विलांस, स्वाट और इंटेलिजेंस विंग के अधिकारी शामिल थे, ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की। प्रभारी निरीक्षक विपिन यादव, संदीप सिंह, और विनय कुमार के नेतृत्व में टीम ने सभी आरोपियों को दबोच लिया।
पुलिस का कहना है कि अगर जांच में सच्चाई सामने नहीं आती, तो निर्दोष मुसलमानों को एक बार फिर फर्जी सांप्रदायिक केस में फँसाया जा सकता था। लेकिन अलीगढ़ पुलिस की तेज़ और निष्पक्ष कार्रवाई ने इस झूठी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं बल्कि एक सामाजिक चेतावनी है — धर्म के नाम पर झूठ फैलाना और निजी विवादों को सांप्रदायिक रंग देना न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि राष्ट्र के खिलाफ अपराध है।
अलीगढ़ ने एक बार फिर साबित किया है कि सच चाहे कितना भी दबाया जाए, वह बाहर आकर झूठ का मुखौटा उतार ही देता है।





