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अमर सोनार बांग्ला हमारी आत्मा है, इसे भगवा चोले वाले कभी नहीं समझ पाएंगे : महुआ मोइत्रा

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तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने “अमर सोनार बांग्ला” को लेकर चल रहे विवाद पर भाजपा और उसकी विचारधारा पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि “अमर सोनार बांग्ला” गीत को रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में बंगाल के विभाजन के खिलाफ विरोध स्वरूप लिखा था। यह गीत बंगालियों की अस्मिता, आत्मा और एकता का प्रतीक है। महुआ मोइत्रा ने याद दिलाया कि इस गीत की पहली दस पंक्तियाँ 1971 में बांग्लादेश के राष्ट्रीय गान के रूप में अपनाई गईं, लेकिन यह रचना पूरी बंगाली संस्कृति और इतिहास की साझा धरोहर है।

उन्होंने कहा, “‘अमर सोनार बांग्ला’ हम सभी बंगालियों के लिए एक भावना है, यह हमारे दिल की धड़कन है। न तो भगवा चोले वाले इसे समझ सकते हैं, और न ही उनकी खरीदी हुई ट्रोल मीडिया इस भावनात्मक जुड़ाव को समझ पाएगी।”

महुआ मोइत्रा के इस बयान को भाजपा पर तीखा हमला माना जा रहा है, खासकर तब जब हाल ही में कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने “अमर सोनार बांग्ला” को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की थी। मोइत्रा ने कहा कि सांस्कृतिक प्रतीकों और ऐतिहासिक गीतों को राजनीतिक रंग देना राष्ट्रविरोधी प्रवृत्ति है, जो बंगाल की सांस्कृतिक एकता पर हमला है।

उन्होंने अंत में कहा, “टैगोर ने यह गीत विभाजन के ज़हर के खिलाफ लिखा था, और आज वही ताकतें फिर समाज को बांटने में लगी हैं। लेकिन बंगाल अपनी मिट्टी की सौंधी खुशबू से इन झूठे रंगों को कभी स्वीकार नहीं करेगा।”

 

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