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परमाणु शक्ति के जनक डॉ. होमी भाभा को राष्ट्र का सलाम

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भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक और आधुनिक विज्ञान के शिल्पकार डॉ. होमी जहांगीर भाभा की जयंती पर आज पूरे देश में श्रद्धांजलि और सम्मान का माहौल रहा। राजनीति, विज्ञान, और शिक्षा जगत के नेताओं ने एक स्वर में उन्हें नमन करते हुए कहा कि भाभा ने न केवल भारत के परमाणु अभियान की नींव रखी बल्कि आधुनिक वैज्ञानिक सोच और आत्मनिर्भरता की भावना को जनमानस में स्थापित किया।

खड़गे बोले — “भाभा का विज़न भारत की वैज्ञानिक तकदीर गढ़ने वाला था”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने डॉ. भाभा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे भारत की वैज्ञानिक नियति के वास्तुकार थे। उन्होंने कहा, “डॉ. होमी जे. भाभा की दूरदृष्टि और वैज्ञानिक नेतृत्व ने हमारे देश के परमाणु और अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी। उनकी प्रतिभा, समर्पण और जिज्ञासा की भावना आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उनका जीवन इस बात का प्रतीक है कि बुद्धिमत्ता, राष्ट्रीय गर्व और निरंतर परिश्रम से कोई भी राष्ट्र प्रगति की नई ऊंचाइयां छू सकता है।”

ममता बनर्जी ने कहा — “उन्होंने भारत की वैज्ञानिक उन्नति की मजबूत नींव रखी”

तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने संदेश में लिखा,

“महान परमाणु भौतिक विज्ञानी डॉ. होमी जहांगीर भाभा की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण। उनके अभूतपूर्व योगदान ने भारत की वैज्ञानिक और परमाणु प्रगति की नींव रखी। उनकी दृष्टि और समर्पण आज भी हमें विज्ञान को मानवता के कल्याण से जोड़ने की प्रेरणा देते हैं।”

प्रह्लाद जोशी बोले — “उनकी दूरदर्शिता ने भारत को वैश्विक पहचान दिलाई”

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि डॉ. भाभा के शोध ने भारत को आत्मनिर्भर वैज्ञानिक राष्ट्र बनने की दिशा दी।

उन्होंने कहा, “हम visionary वैज्ञानिक पद्मभूषण डॉ. होमी जे. भाभा जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने परमाणु अनुसंधान की जिस राह पर भारत को आगे बढ़ाया, उसी ने हमें वैश्विक मंच पर वैज्ञानिक सम्मान दिलाया।”

प्रेम खांडू ने कहा — “उन्होंने परमाणु ऊर्जा को मानवता के उत्थान का साधन बताया”

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता पेमा खांडू ने अपने श्रद्धांजलि संदेश में लिखा, “डॉ. होमी जहांगीर भाभा को उनकी जयंती पर सादर नमन। वे ऐसे दूरदर्शी वैज्ञानिक थे जिन्होंने परमाणु को विनाश नहीं बल्कि मानवता की उन्नति का प्रतीक बताया। उन्होंने ‘Atoms for Peace’ की भावना दी — जहां विज्ञान का उपयोग विकास और आत्मनिर्भरता के लिए हो, न कि विनाश के लिए।”

डी.के. शिवकुमार बोले — “भाभा ने विज्ञान को कला और संस्कृति से जोड़ा”

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता डी.के. शिवकुमार ने कहा कि डॉ. भाभा केवल एक वैज्ञानिक नहीं बल्कि एक संपूर्ण भारतीय चिंतक थे। उन्होंने कहा, “उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर का नेतृत्व करते हुए भारत के परमाणु भविष्य को आकार दिया। वे विज्ञान, कला और संस्कृति को साथ लेकर चलने वाले अद्भुत व्यक्तित्व थे। उनका विज़न आज भी वैज्ञानिकों और नवोन्मेषकों के लिए प्रेरणास्रोत है।”

जी. किशन रेड्डी बोले — “उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की वैज्ञानिक नींव रखी”

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा,

“डॉ. होमी जे. भाभा भारत के परमाणु कार्यक्रम के पिता ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर वैज्ञानिक भारत के स्थापक थे। उनका योगदान राष्ट्रीय सुरक्षा, वैज्ञानिक प्रगति और आत्मनिर्भरता के आधार स्तंभ के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।”

बीजू जनता दल ने कहा — “भारत को मज़बूत करने वाले वैज्ञानिकों में अग्रणी थे भाभा”

बीजू जनता दल (BJD) ने भी ट्वीट करते हुए लिखा,

“भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जे. भाभा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उनके नवाचार और दूरदर्शी कार्यों की विरासत भारत को सशक्त बनाने के लिए सदैव याद की जाएगी।”

भाभा की विरासत — विज्ञान को राष्ट्र सेवा से जोड़ने की कहानी

डॉ. होमी जे. भाभा ने 1945 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना की और 1954 में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) की नींव रखी। उन्होंने पंडित नेहरू के साथ मिलकर भारत के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की। उनका मानना था कि “विज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज के विकास और मानवता के कल्याण में योगदान दे।”

एकता का संदेश — दल बदल, विचारधारा बदली पर भाभा का सम्मान सबका साझा

आज उनकी जयंती पर सभी दलों के नेताओं ने जिस एक स्वर में श्रद्धांजलि दी, वह इस बात का प्रतीक है कि भाभा की विरासत राजनीतिक नहीं, राष्ट्रीय है।

उनकी सोच ने भारत को “विज्ञान में आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण” का मंत्र दिया — और यही कारण है कि आज हर विचारधारा, हर दल और हर वैज्ञानिक संस्था उन्हें भारत की वैज्ञानिक आत्मा का प्रतीक मानती है।

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